शामली। जिले में डिप्थीरिया से बचाव के लिए विद्यालयों में 10 वर्ष और 16 वर्ष के विद्यार्थियों को टीडी टीकाकरण अभियान लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया। 10 वर्ष तक के विद्यार्थियों को लक्ष्य के सापेक्ष 90 प्रतिशत और 16 वर्ष के विद्यार्थियों को 54 प्रतिशत टीके लग पाए।
डिप्थीरिया यानी गलघोंटू बीमारी से बचाव के लिए बच्चों में टीकाकरण किया जाता है। टीकाकरण से वंचित बच्चों और किशोरों में डिप्थीरिया होने की आशंका रहती है। जिले में डिप्थीरिया के केस मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 24 अप्रैल से 10 मई तक जिले के सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में डिप्थीरिया से बचाव के लिए टीडी-10 और टीडी-16 टीके लगाने का अभियान चलाया गया। दस वर्ष की आयु वाले कक्षा पांच में पढ़ने वाले छात्रों को टीडी-10 और कक्षा 10 में पढ़ने वाले 16 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों को टीडी-16 के टीके लगाए गए।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. करण चौधरी ने बताया कि 715 विद्यालयों में टीके लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 720 विद्यालयों में 567 सत्र लगाकर टीकाकरण किया गया। टीडी-10 के टीके 13703 विद्यार्थियों को लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 12199 यानि 90 प्रतिशत विद्यार्थियों को टीकाकरण हुआ। इसी तरह टीडी 16 के टीके 7314 विद्यार्थियों को लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 3949 यानि 54 प्रतिशत टीके लग पाए।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि टीडी-16 के टीकाकरण कम होने की वजह ये रही कि 16 वर्ष की आयु वाले विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के कारण विद्यालयों में कम आ पा रहे थे। जिन विद्यार्थियों को ये टीके नहीं लगे हैं, वे सरकारी अस्पताल में लगवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण ही डिप्थीरिया से बचाव है।
- डिप्थीरिया के लक्षण
- तेज बुखार होना।
- गला खराब होना।
- गले में झिल्ली बनना।
- सांस लेने में परेशानी होना।
इस तरह से होता है टीकाकरण
बच्चों में पहला टीका छह सप्ताह से शुरू होता है। इसके बाद दूसरा 10 महीने पर व 14 महीने पर लगता है। इसके बाद 16 से 24 महीने के बीच टीका लगाया जाता है। इसके बाद पांच वर्ष, फिर 10 वर्ष और इसके बाद 16 वर्ष की आयु में टीका लगाया जाता है।