शामली। बेहतर पैदावार लेने के लिए किसान अब डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से पैदावार भी अधिक होगी। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को इस संबंध में जागरूक कर रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि जिले में 6088.300 मैट्रिक टन यूरिया, 1670.300 मैट्रिक टन डीएपी, 969.950 मैट्रिक टन एनपीके, 75.800 मैट्रिक टन एमओपी, 470.100 मैट्रिक टन एसएसपी मौजूद है।जिले में किसी भी प्रकार के उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। रबी अभियान के तहत किसान सरसों, गेहूं की बुवाई कर रहे हैं।
सरसों की बुवाई में किसान एसएसपी यानी सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग अन्य उर्वरकों की तुलना में अधिक से अधिक करें। जिससे भूमि को अन्य पोषक तत्वों के साथ सल्फर भी मिल सके और गेहूं की बुवाई में डीएपी की तुलना में एनपीके का प्रयोग अधिक करें जिससे फसल को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की उपलब्धता हो सके।
एनपीके उर्वरक की खासियत
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार एनपीके उर्वरक में 12 फीसदी नाइट्रोजन, 32 फीसदी फास्फोरस और 16 फीसदी पोटाश की मात्रा होती है। गेहूं और मक्का की बुवाई में डीएपी के स्थान पर एनपीके खाद का प्रति हेक्टेयर 188 किलोग्रा. प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाना चाहिए। डीएपी जितना कारगर है, उतना ही एनपीके उर्वरक कारगर है।
अनिवार्य रूप से कैश मैमो देने के निर्देश
जिला कृषि अधिकारी ने उर्वरक विक्रेताओं को भी निर्देश दिए हैं कि बिक्री पर अनिवार्य रूप से कैश मैमो देने, पीओएस मशीन से उर्वरक बिक्री के साथ-साथ स्टॉक रजिस्टर को अपडेट रखने के निर्देश दिए। किसानों से अपील की है कि वह संतुलित मात्रा में ही उर्वरकों का प्रयोग करें ओर अनावश्यक रूप से किसी भी प्रकार के उर्वरकों का भंडारण नहीं करें।