एसटीएफ के सूत्रों के अनुसार, जांच में पता चला है कि पाकिस्तान के लाहौर और कोटादू में भारत से जाने वाले लोेगों को मालामाल बनाने का झांसा देकर 15 से 17 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें उन्हेें नकली नोटों को किस तरह से चलाना है, हथियारों की तस्करी किस नाम और कैसे करनी है। यह बताया जाता है। तहसीम को भी आईएसआई एजेंट दिलाशाद मिर्जा, इकबाल काना और अन्य ने 17 दिन तक की ट्रेनिंग दी थी।
मोबाइल पर भी नकली नोटों को भेजा जाता था ताकि किसी तरह की दिक्कत डिलीवरी के दौरान नहीं हो। शाहिद के लगातार तहसीम संपर्क में था। उसी के इशारे पर नकली नोट मंगवाए जा रहे थे। एसटीएफ और पुलिस ने गिराेह के फरार चल रहे सदस्य सहारनपुर के रहने वाले यूसुफ की तलाश में तीसरे दिन भी शामली, सहारनपुर के कई स्थानों पर दबिश दी।
एसटीएफ के एएसपी बृजेश सिंह का कहना है कि जल्द ही गिरोह के फरार सदस्य भी गिरफ्त में होंगे। वेस्ट यूपी के शामली के अलावा बागपत, मेरठ और अन्य जिलों के लोग पिछले कुछ समय में पाकिस्तान गए थे, उनकी गतिविधियों की जानकारी हासिल की जा रही है।
यह है मामला
शहर के मोहल्ला नौकुआं रोड बर्फ वाली गली निवासी कलीम को 17 अगस्त को एसटीएफ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई एजेंट के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस मामले में एसटीएफ के निरीक्षक प्रशांत कपिल की तरफ से शहर कोतवाली में कलीम, उसके भाई तहसीम उर्फ मोटा और सहारनपुर निवासी यूसुफ उर्फ समशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
एसटीएफ ने उस समय बताया था कि जांच में कलीम का भाई तहसीम भी आईएसआई के संपर्क में है। व्हाट्सएप पर भारत के सैन्य क्षेत्रों के फोटो भेजे थे। जांच में सामने आया था कि सहारनपुर का रहने वाला यूसुफ भी दोनों भाइयों के संपर्क में रहकर फर्जी सिम उपलब्ध करा रहा था।
एसटीएफ ने दावा किया था कि कलीम पाकिस्तान में बैठे आईएसआई एजेंट दिलशाद मिर्जा के संपर्क में था। तीन दिन पूर्व ही एसटीएफ और पुलिस ने फरार चल रहे कलीम के भाई तहसीम को गिरफ्तार किया था।