यह पॉलिसी चार अप्रैल 2022 तक वैध थी। परिवादनी के मुताबिक 22 अगस्त 2022 की रात में शॉर्ट सर्किट से दुकान में आग लगने से फर्नीचर, फिटिंग व अन्य सामान जलकर नष्ट हो गया था।
इसी जानकारी बीमा कंपनी को देते हुए सभी प्रपत्र उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया। तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने बीमा दावा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उन्होंने बीमित स्थान का परिवर्तन कर दिया है जबकि यह आधार बिल्कुल असत्य है। वह बीमित स्थान पर ही अपना कार्य कर रही है।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता व सदस्य अभिनव अग्रवाल ने मामले की सुनवाई की। अध्यक्ष ने इंश्योरेंस कंपनी को 11 लाख 39 हजार 900 रुपये मय 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज क्लेम निरस्तीकरण तिथि से अंतिम अदायगी तक, शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के 50 हजार रुपये, परिवाद व्यय के दस हजार रुये परिवादनी को भुगतान करने के लिए आयोग में जमा करने का आदेश सुनाया।
बीमा कंपनी के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राजाराम चौधरी द्वारा इस मामले में किए गए अनुचित व्यापार, व्यवहार और अनैतिक आचरण के लिए दो लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित भी किया।
आयोग के अध्यक्ष ने यह भी आदेश सुनाया कि अर्थदंड की धनराशि बीमा कंपनी अपने तत्कालीन शाखा प्रबंधक से वसूल की जाएगी। किसी भी सूरत में अर्थदंड की धनराशि बीमा कंपनी के खजाने से अदा नहीं की जाएगी। अर्थदंड की धनराशि परिवादनी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।