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बेमौसम बारिश आलू उत्पादक किसानों के लिए आफत बन कर आई

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बेमौसम बारिश आलू की फसल के लिए आफत बनी
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शामली। दो दिन की बेमौसम बारिश आलू उत्पादक किसानों के लिए आफत बनकर आई है। जिले में आलू की फसल को 50 फीसदी तक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। कई किसानों को खेतों में पानी भरने के बाद बीज गलने के चलते दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है।
जिले में 750-800 हेक्टेयर में आलू की बुवाई होती है। 25 सितंबर से नवंबर माह तक आलू की बुवाई की जाती है। इस बार आलू की बुवाई बारिश से लेट हो गई थी। अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में बुवाई शुरू हुई थी। पिछले 10-15 में जिलेभर में 25-30 प्रतिशत आलू की बुवाई हुई है। थानाभवन, जलालाबाद, शामली, कैराना और ऊन तहसील क्षेत्र में दो हजार बीघा से ज्यादा आलू की बुवाई हुई है। जलालाबाद क्षेत्र के दखोड़ी जमालपुर निवासी प्रदीप चौधरी, जलालाबाद के सरदार दर्शन सिंह राबड़ा और जलालाबाद क्षेत्र के किसान उपेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि दो दिन की बारिश से आलू की बोई गई फसल को काफी नुकसान पंहुचा। आलू की बुवाई के 20-25 दिन बाद फसल में पानी की आवश्यकता होती है। दो दिनों की बारिश से आलू की फसल को 50 प्रतिशत नुकसान पहुंचा है। बारिश का पानी खेत में सूख जाने के बाद पता चलेगा कि मिट्टी में आलू का बीज गलकर कितना खराब हुआ है।
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शामली के किसान व प्रमुख मंडी आढ़ती बाबूराम सैनी ने बताया कि उन्होंने 100 बीघा आलू बुवाई है। बारिश के कारण ज्यादा आलू का बीज खराब होने की आशंका है। उनका कहना है कि अभी तक बोई गई आलू की फसल को पचास प्रतिशत किसानों को नुकसान है। आलू के बीज गलने के चलते दोबारा खेत तैयार करके आलू की बुवाई करनी पड़ सकती है। शामली के किसान सन्नी निर्वाल, सूरज निर्वाल का कहना है कि 40 बीघा आलू की फसल की बुवाई की थी। उनका भी नुकसान हुआ है। जिला उद्यान अधिकारी हरित कुमार का कहना है कि आलू का सरकारी बीज अभी प्राप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि बारिश से आलू की फसल को काफी नुकसान की आशंका है।
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