शामली। जिले में टॉप बोरर यानि शीर्ष छेदक रोग से 15 से 20 प्रतिशत तक गन्ने की फसल प्रभावित हो चुकी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान इसके कीट की सिल्वर सफेद रंग तितली से पहचान कर सकते हैं। पहचान होने पर उसको नियंत्रित करने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करें। उन्होंने फसल को किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया।
कृषि विज्ञान केंद्र जलालपुर के प्रभारी संदीप चौधरी ने बताया जिले में 77 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की बुआई होती है। इस बार टॉप बोरर रोग से अब तक 15 से 20 प्रतिशत तक गन्ने की फसल प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि गन्ने के बेधकों, शीर्ष बेधक के शलभों पर चांदी जैसे सफेद रंग से इसके कीट की पहचान की जा सकती है। मादा कीट के शरीर के पिछले भाग पर नारंगी रंग के बाल होते हैं। यह कीट सुबह ठंडे मौसम में गन्ने के शीर्ष पत्तों पर चिपके हुए पाए जाते हैं। दिन चढ़ने के साथ ही कीट पत्तों के खोल में जाकर छिप जाता है। मादा कीट नई ताजी पत्तियों के नीचे देती है।
एक मादा कीट 200-250 अंडे देती है। अंडे से लार्वा निकालकर फसल की गोभ में प्रवेश कर जाता है। यह लार्वा फसल के विकास को रोक देता है। कीट के लार्वा के मुकाबले तितली को नियंत्रित करना आसान होता है। इसलिए किसानों को कीट की सिल्वर सफेद रंग की तितली की पहचान कर उसको नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र बागपत के प्रभारी एवं शामली जिले के मूल निवासी कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर विकास मलिक का कहना है कि बागपत जिले में टाॅप बोरर यानि शीर्ष छेदक कीट का रोग बढ़ रहा है।
थानाभवन में फोरोवेन ट्रेप लगाए
शामली। थानाभवन चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक लेखपाल सिंह ने बताया कि टाॅप बोरर कीट से बचाव के लिए दो हजार किसानों के खेतों में फोरोवेन ट्रेप लगाए जा रहे है। इस कैप्सूल में काला तेल डाला जाता है। तेल की सुगंध से मादा कीट पकड़ा जाता है।
इस तरह करें रोग से बचाव
-खेतों में फैरोमोन ट्रैप लगाए। जिन खेतों में फैरोमोन ट्रैप लगाए दो माह हो गए, वहां दूसरा कैप्सूल लगाए।
- कोराजन की ड्रेंचिंग 150 एमएल प्रति एकड़ 400 लीटर पानी के साथ करें। ट्राइकोकार्ड का प्रयोग करें।
- खेत में जिन पत्तियों पर टॉप बोरर की तितली ने अंडे दे रखे हैं। उन्हें तोड़कर बाहर निकाल कर नष्ट करें। क्योंकि एक पत्ती पर 200 से 250 तक अंडे होने से इतनी ही सुंडी बनने की संभावना रहती है।
- रोजाना अपने खेतों की निगरानी रखें। किसानों के सामूहिक नियंत्रण के प्रयास से कीट को नियंत्रित किया जा सकता है ।
पश्चिमी उप्र के इन जिलों में है टाप बोरर का प्रकोप
शामली। कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने बताया शीर्ष छेदक कीट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत बुलंदशहर, बिजनौर आदि जिलों में गन्ने की फसल प्रभावित हो रही है। इस कीट की दूसरी पीढ़ी (ब्रूड) का प्रकोप बढ़ रहा है। तीसरा ब्रूड जून में, चौथा ब्रूड अगस्त में और पांचवां सितंबर में दिखाई देता है। तीसरी पीढ़ी (ब्रूड) सबसे हानिकारक होती है। इसमें कीट का हमला कल्ले निकलने की प्रक्रिया के पूरा होने के बाद और गन्ना बनना शुरू होने पर होता है। इस कीट से प्रभावित पौधे में मिल योग्य गन्ने नहीं बनते। कीट फरवरी से नवंबर तक सक्रिय रहता है और सर्दियों के महीनों के दौरान यह गन्ने में परिपक्व लार्वा के रूप में सुप्तावस्था में रहता है।