आठ माह में दूध के 18 सैंपल लिए, आठ फेल
शामली। दूध सेहत के लिए सर्वोत्तम आहार माना जाता है। सभी बच्चों को बचपन से ही दूध पिलाने की सलाह देते हैं। लेकिन सिंथेटिक, मिलावटी दूध जिले के लोगों के आहार का हिस्सा बन गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इस वर्ष आठ माह में दूध के 18 सैंपल लिए। जिनमें से आठ फेल हो गए। ये सभी मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। करीब आधे सैंपल फेल होने से साफ है कि मिलावट का यह कारोबार जिले में धड़ल्ले से चल रहा है।
प्रतिदिन लाख लीटर दूध का उत्पादन
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी यशवंत सिंह के मुताबिक जिले में करीब 80 हजार दुधारू पशु हैं। जिनसे करीब तीन लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें से 50 हजार लीटर दूध जिले से बाहर सप्लाई किया जाता है। जबकि ढाई लाख लीटर दूध की जिले में ही खपत होती है।
दूध में मिलावट को ऐसे पहचानें
1 - दूध में पानी की मिलावट को परखने के लिए किसी लकड़ी या पत्थर पर दूध की एक या दो बूंद गिराएं। अगर दूध बहकर नीचे की तरफ गिरे और सफेद निशान बन जाए तो दूध पूरी तरह से शुद्ध है।
2 - दूध में डिटर्जेंट की मिलावट को पहचानने के लिए, दूध की कुछ मात्रा को एक कांच की शीशी में लेकर जोर से हिलाएं। यदि दूध में झाग निकलने लगें तो इस दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है। यह झाग देर तक बना रहे, तो दूध मिलावटी है।
3 - दूध को सूंघकर देखें, यदि दूध मिलावटी है, तो उसमें साबुन की तरह गंध आएगी और अगर दूध असली है तो उसमें इस तरह की गंध नहीं आती।
4 - दूध को दोनों हाथों में लेकर रगड़कर देखें। अगर दूध असली है, तो सामान्य तौर पर चिकनाहट महसूस नहीं होगी। लेकिन अगर दूध मिलावटी है, तो इसे रगड़ने पर बिल्कुल वैसी ही चिकनाहट महसूस होगी, जैसी कि डिटर्जेंट को रगड़ने पर होती है।
5 - दूध को देर तक रखने पर, असली दूध अपना रंग नहीं बदलता है। जबकि दूध अगर नकली है, तो वह कुछ समय बाद पीला पड़ने लगेगा। असली दूध को उबालने पर उसका रंग बिल्कुल नहीं बदलेगा, लेकिन नकली दूध का रंग उबलने पर पीला हो जाएगा।
6 - सिंथेटिक दूध में अगर यूरिया मिला हुआ है, तो वह गाढ़े पीले रंग का हो जाता है। स्वाद के मामले में असली दूध हल्का-सा मीठा स्वाद लिए हुए होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोड़ा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है।
वर्ष सैंपल फेल नमूने
2019-20 15 6
2020-21 14 4
2021-22 18 8
कोट -----
मिलावट करने वालों पर खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग लगातार कार्रवाई करता है। जिन मामलों में सैंपल फेल हुए हैं ऐसे कई मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं - विनय चतुर्वेदी, जिला अभिहीत अधिकारी।