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हरियाली तीज पर कोरोना का असर, नहीं होंगे सामूहिक कार्यक्रम

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शामली हरियाली तीज पर जानकारी देती महिला आंचल - फोटो : SHAMLI
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हरियाली तीज पर नहीं होंगे सामूहिक कार्यक्रम
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शामली। पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना महामारी का असर हरियाली तीज के कार्यक्रमों पर पड़ा है। पिछले सालों में होने वाले सामूहिक कार्यक्रम इस बार भी नहीं हो पाएंगे, जिससे त्योहारों की रौनक फीकी रहेगी। न महिलाएं सामूहिक रूप से झूला झूल सकेंगी और न ही सावन के गीतों का आनंद ले पाएंगी। घर पर रहकर ही त्योहार मनाएंगी और ऑनलाइन रहकर अपनी सहेलियों से त्योहार सेलीब्रेट कर कार्यक्रम का आनंद उठाएंगी।
हनुमान धाम पर नहीं होगा हरियाली तीज महोत्सव
शामली। हनुमानधाम पर मंदिर समिति की तरफ से हरियाली तीज के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता रहा है। कोरोना की वजह से पिछले साल भी हरियाली तीज पर सामूहिक कार्यक्रम नहीं हुआ था। इस बार भी कोई कार्यक्रम नहीं रखा गया है। हनुमानधाम मंदिर समिति के अध्यक्ष सलिल द्विवेदी ने बताया कि कोरोना की वजह से हरियाली तीज पर इस बार भी सामूहिक रूप से कोई कार्यक्रम नहीं रखा गया है। जो कार्यक्रम होगा वह सिर्फ सांकेतिक होगा।
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बोली महिलाएं...
शादी के बाद पहली हरियाली तीज का त्योहार अपने मायके में मनाए जाने की परंपरा है। कोरोना काल में स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हरियाली तीज घर पर परिवार की महिलाओं के साथ मनाया जाएगा। ऑनलाइन रहकर अपनी सहेलियों और परिचितों के साथ तीज महोत्सव को सेलिब्रेज करेंगी। इससे त्योहार भी मनेगा और सुरक्षा भी होगी।
- आयुषी, जैन विहार।
शादी के बाद पहली हरियाली तीज है। परंपरा के अनुसार पहला तीज का त्योहार मायके में मनाया जाएगा। कोरोना काल में सामूहिक रूप से हरियाली तीज पर कार्यक्रम न होने का मलाल तो है, लेकिन त्योहार के साथ अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है।
आंचल, धर्मपुरा गुजरातियान।
आधुनिकता की चकाचौंध में गुम हुए सावन के गीत
शामली। हरियाली तीज के त्योहार पर महिलाओं में उत्साह रहता है। पुराने समय में महिलाएं इकट्ठी होकर त्योहार मनाती थी। सावन के गीत गाए जाते थे, लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध में सावन के गीत गुम होते जा रहे हैं। इस त्योहार की तैयारी करीब 15 दिन पहले से शुरू हो जाती थी। त्योहार के दिन तो हर गली मोहल्ले में सावन के गीत सुनाई देते थे, जिससे त्योहार की रौनक देखते ही बनती थी। हरियाली तीज के त्योहार को लेकर बुजुर्ग महिलाओं से बात की गई।
98 वर्षीय शरबती देवी ने बताया कि पुराने समय में कई दिन पहले घरों में झूले पड़ जाया करते थे। त्योहार के दिन संज संवरकर परिवार व आसपड़ोस की महिलाएं व सखी सहेली झूला झूलती थी। सावन के गीत गाती थी। अब त्योहार पर पहले जैसी बात नहीं रही।
70 वर्षीय कृष्णा देवी ने बताया कि त्योहार को लेकर कई दिन पहले तैयारी हो जाती थी। त्योहार को लेकर उल्लास व उमंग का माहौल रहता था। अब त्योहार कब आया और कब गया, पता ही नहीं चलता। अब तो ऐसा लगता है कि त्योहार की परंपरा मनाई जा रही है। अब कहीं पर सावन के गीत सुनाई नहीं देते।
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86 वर्षीय पुष्पलता का कहना है कि सावन का महीना आते ही झूले पड़ जाते थे। अब झूले दूर-दूर तक नजर नहीं आते। पहले सभी मिलजुलकर त्योहार मनाते थे। सावन के गीत गाते थे। बहुत आनंद आता था, लेकिन अब किसी के पास इतना समय नहीं रहा कि इकट्ठे होकर त्योहार मना ले।

शामली हरियाली तीज पर हाथ पर रची महैदी दिखाती महिला- फोटो : SHAMLI

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