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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में कांटे की होगी टक्कर

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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में कांटे की होगी टक्कर
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शामली। राजनीति का ऊंट कब किस करवट बैठ जाए इसका पता नहीं होता। पांच साल पहले जो एक-दूसरे के हबीब (दोस्त) थे आज रकीब (दुश्मन) बने हुए हैं। कभी खासमखास रहे पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह और सपा नेता शेर सिंह राणा, अनिल टीनू एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हुए हैं। दोनों अपने-अपने दलों के प्रत्याशी को जिताने के लिए जोड़तोड़ में लगे हैं। मंगलवार को नामांकन के दिन किसी ने भी पर्चा वापस नहीं लिया। भाजपा से जीतकर आईं मधु जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीद हैं। भाजपा प्रत्याशी मधु के सामने सपा-रालोद से संयुक्त प्रत्याशी अंजलि है। दोनों के बीच कांटे का मुकाबला होना तय है। तीन जुलाई को होने वाले मतदान के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि विजेता का ताज किसके सिर पर सजेगा।
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पांच साल पहले पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह समाजवादी पार्टी में थे। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव उनकी पुत्रवधू शैफाली चौहान ने लड़ा था। विरेंद्र सिंह के साथ में जिला पंचायत सदस्य के रूप में शेर सिंह राणा, अनिल टीनू, पंजाब सिंह खड़े थे। अध्यक्ष पद के चुनाव में सभी ने शैफाली का साथ दिया था। हालांकि शैफाली चौहान जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हार गईं थी। समय बदल गया है और ऐसे समीकरण बने कि पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह सपा छोड़कर लोकसभा चुनाव 2019 से पूर्व भाजपा में शामिल हो गए। लोकसभा चुनाव में भाजपा का परचम लहराया। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। भाजपा से जीतकर आईं मधु जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीद हैं। तीन जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान है। भाजपा प्रत्याशी मधु के सामने सपा-रालोद से संयुक्त प्रत्याशी अंजलि है। अंजलि दखौड़ी जमालपुर की हैं। वह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्ड एक से सदस्य पद का जीती हैं। अंजलि का चुनाव सपा नेता थानाभवन ब्लाक के पूर्व प्रमुख शेर सिंह राणा और अनिल टीनू लड़ा रहे हैं। एक जमाने में सपा नेता ठाकुर शेर सिंह राणा और अनिल टीनू पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह खासमखास थे। इस बार प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, सांसद प्रदीप चौधरी, विधायक तेजेंद्र निर्वाल, पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह के साथ खड़े हैं। चुनाव आमने-सामने का है। दोनों तरफ से कड़ी चुनौती है।
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