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पांच गोवंश की मौत से प्रशासन में हड़कंप

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शामली क्षेत्र के गांव कुडाना में मृतक पशुओ के देखने के लिये ग्रामिणो की भीड - फोटो : SHAMLI
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पांच गोवंश की मौत से प्रशासन में हड़कंप
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शामली। कुड़ाना गांव में किसान के पांच गोवंश की संदिग्ध मौत से प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। एक भैंसे की हालत अभी भी गंभीर है। एसडीएम बृजेश कुमार सिंह और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी यशवंत सिंह भी गांव पहुंचे। प्रशासन ने किसान को मदद का आश्वासन दिया है। वहीं, पशुपालन विभाग ने पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित रखा है। जिसे जांच को भेजा जा रहा है। इसके साथ ही चारे के सैंपल को भी जांच के लिए भेजा गया है।
कुड़ाना निवासी किसान रामफल सिंह के पांच गोवंश और एक भैंसे की सोमवार को चारा खाने के बाद हालत बिगड़ गई थी। पांच गोवंशों की मौत हो गई। जबकि भैंसे की हालत गंभीर है। सूचना पर रात में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. यशवंत और हल्का लेखपाल गांव में पहुंचे और भैंसे का उपचार शुरू कराया। मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम भी किया गया। जिसके बाद बिसरा जांच के लिए आगरा लैब भेजा गया।
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मंगलवार को एसडीएम बृजेश कुमार सिंह, गठवाला खाप के बहावड़ी थांबेदार श्याम सिंह भी गांव में पहुंचे। थांबेदार श्याम सिंह और अन्य ग्रामीणों ने रामफल की आर्थिक स्थिति कमजोर बताते हुए प्रशासन से मदद की मांग की। लेखपाल ने रिपोर्ट बनाई है, जिसमें मृत गोवंशों की अनुमानित कीमत तीन लाख रुपये आंकी गई। रिपोर्ट में रामफल सिंह को प्रधानमंत्री आवास योजना, अंत्योदय कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, गन्ने का शीघ्र भुगतान, आयुष्मान कार्ड का लाभ देने की संस्तुति की गई है।
वहीं, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. यशवंत ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद बिसरा जांच के लिए फारेंसिक लैब आगरा भिजवाया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि विषाक्त चारा खाने से मौत हुई है। पराली में फंगस की वजह से भी मौत हो सकती है। लैब की रिपोर्ट के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा। कोतवाल यशपाल सिंह ने बताया कि इस मामले में अज्ञात के खिलाफ जीडी में तस्करा डाला गया है।
नमी युक्त पराली पशुओं को न खिलाएं, हो सकती है मौत
शामली। नमी युक्त धान की पराली में जहरीला फंगस पैदा हो जाता हैं। इसके सेवन से मवेशी की मौत भी हो सकती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने पशुओं के मुंह से अधिक मात्रा में लार आने, आंखों से पानी आने की दशा में तत्काल नजदीकी पशु अस्पताल से संपर्क कर योग्य चिकित्सक से उपचार सुनिश्चित कराने को कहा है। सीवीओ ने मवेशियों को बीमारी से बचाने के लिए पालकों को नियमित टीकाकरण के साथ ही समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की जांच करवाने की बात कहते हुए चारे में पोषाहार आदि का प्रयोग करने की भी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि पशुपालकों को मवेशी के इलाज में कोई भी परेशानी हो रही तो वह कार्यालय में संपर्क पर शिकायत के साथ मवेशी की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकता है।
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दो वर्ष पूर्व कादरगढ़ में 12 से ज्यादा पशुओं की हुई थी मौत
दो वर्ष पूर्व थानाभवन क्षेत्र के कादरगढ़ गांव में 12 से ज्यादा पशुओं की मौत हो गई थी। इन मवेशियों में भी ऐसे ही लक्षण दिखाई दिए थे। इन सभी की हालत भी पराली का चारा खिलाने के बाद ही बिगड़ी थी।

शामली क्षेत्र के गांव कुडाना में मृतक पशुओ के देखने के लिये ग्रामिणो की भीड- फोटो : SHAMLI

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