शामली। शहर के रहने वाले बीस साल के युवक को लगता था कि उसके गले में गंदगी फंसी हुई है, जिसके कारण वह बार-बार गले के अंदर तक ब्रश को ले जाकर सफाई का प्रयास करता। अंदर तक जाने के कारण ब्रश फंस गया। ऑपेरशन से चिकित्सकों की टीम ने ब्रश को निकाला। जांच में पता चला कि युवक मनोग्रसित बाध्यता विकार (ओसीडी) की चपेट में था। जिला अस्पताल के मन कक्ष में ओसीडी से ग्रस्त इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। गर्मी के मौसम में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है।
मानसिक रोगियों के उपचार के लिए जिला अस्पताल में मन कक्ष स्थापित किया गया है। मनोचिकित्सक डाॅ. उर्वशी, काउंसलर और नैदानिक मनोवैज्ञानिक प्रेरणा ने बताया कि गर्मी के मौसम में ओपीडी बढ़ी है। हर रोज 60 से लेकर 65 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि पूर्व में 30 से लेकर 40 मरीज ही पहुंच रहे थे। हर माह 50 से अधिक मरीज मनोग्रसित बाध्यता विकार के पहुंच रहे हैं। जिनमें ओपीडी में मनोचिकित्सकों के सामने अजीबोगरीब मामले भी आ रहे हैं। इस तरह के मामलों की बानगी
केस-1
एक 20 साल की युवती ओसीडी की चपेट है। जिसकी काउंसिलिंग की गई तो पता चला है वह अक्सर थूकती रहती है( उसे लगता है कि यदि थूक मुंह के अंदर चला गया तो शरीर को दिक्कत हो जाएगी। यही नहीं, थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ धोती रहती है। उसे लगता है कि हाथ में गंदगी लगी हुई है। काउंसलिंग और दवाई के माध्यम से अब युवती को ठीक किया जा रहा है।
केस-2
शहर की रहने वाली महिला को लगता है कि उसके पेट में कांच है, जिसके कारण वह बार-बार डरती है, पेट दर्द की शिकायत करती है। बार-बार हाथ भी धोती रहती है। मानसिक रोग के कारण ही महिला ऐसा कर रही है। महिला की काउंसिलिंग करते हुए इलाज किया जा रहा है।
ये मामले तो बानगी भर मात्र है। ओएसडी से ग्रस्त मरीजों की संख्या ओपीडी में लगातार बढ़ रही है। मनोचिकित्सक सावधानी बरतने के साथ-साथ इलाज कराने के टिप्स दे रहे हैं।
अक्सर तनाव के कारण होता है ऐसा
डॉ. उर्वरी, प्रेरणा और काउंसलर आशा शर्मा का कहना है कि तनाव के कारण कई बार महिला या फिर पुरुष ओएसडी की चपेट में आ जाते हैं। या फिर उन्हें कोई भावनात्मक रूप से दुख पहुंचा हो, ऐसा कोई परिवार में माहौल मिला हो। इसके लिए परिजनों को पीड़ित का उपचार कराना चाहिए। इस बीमारी का उपचार संभव है।
बचाव को यह करें
: जो समस्याएं हैं उन्हें दूर करने का प्रयास करें
: पीड़ित का खानपान ठीक रखें
: इस तरह की गतिविधियों में भाग लें, जिससे पीड़ित को ठीक लगता हो
: तनाव दिखने पर तुरंत ही नजदीकी मनोचिकित्सक से संपर्क करें।
: इस समस्या से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपने आप को व्यस्त रखें।
हमेशा सकारात्मक सोचें और कार्य में अपना दिमाग लगाएं।
पर्याप्त नींद सही भोजन और व्यायाम और ध्यान से ही इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।
मानसिक बीमारी है
मनोचिकित्सक डॉ. उर्वशी और प्रेरणा पुंडीर के अनुसार मनोग्रसित बाध्यता विकार (ओसीडी) में व्यक्ति को अनुचित विचार आने लगते हैं और डर की आशंकाएं होने लगती हैं। इसके साथ ही वह एक ही काम को बार-बार करने या जांचने पर विवश होते हैं। इस बीमारी को डॉक्टरी भाषा में ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर कहा जाता है। यदि इस समस्या के साथ मरीज को तनाव भी है तो यह गंभीर समस्या हो सकती हैं। ऐसे में आत्महत्या की ख्याल भी आते हैं। इसलिए जरूरी है कि इस समस्या की जानकारी अपने परिवार से साझा करें और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। हालांकि, यह कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका समय रहते इलाज जरूरी है।
बीमारी के लक्षण
: बार-बार हाथ धोना, नहाना या दांतों को साफ करना।
: कपड़ों पर बार-बार जिप और बटन की जांच करना।
: एक ही विचार बार-बार मन में आना
: विचार रोकने पर अत्यधिक उलझन में होना
: कार्य बार-बार करने से उलझन का थोड़ी देर के लिए शांत होना
नोट : यदि आप या फिर आपका कोई जानने वाला किसी तरह के मानसिक रोग से ग्रस्त है तो हमें मोबाइल नंबर 9548521732 पर सवाल लिखकर व्हाट्सएप पर भेजें। मनोचिकित्सक, काउंसर के माध्यम से समाधान का प्रयास किया जाएगा।