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Shamli News: जिले की कृषि भूमि की सेहत लगातार हो रही खराब

Wed, 03 Jun 2026 01:01 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। जिले की कृषि भूमि की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। कृषि विभाग की कैराना प्रयोगशाला में लिए गए करीब 10 हजार मिट्टी नमूनों की जांच में 7333 नमूनों में जीवांश कार्बन सामान्य से कम पाया गया है। विशेषज्ञों ने इसे गंभीर संकेत मानते हुए चेतावनी दी यदि इसी तरह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग जारी रहा तो आने वाले वर्षों में जमीन की उपजाऊ क्षमता और तेजी से घट सकती है।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार जिले के पांचों ब्लॉकों में मिट्टी की स्थिति कमजोर पाई गई है। इनमें सबसे खराब स्थिति कैराना ब्लॉक की रही, जहां 2300 नमूनों में से 1705 में जीवांश कार्बन 0.1 से 0.5 प्रतिशत के बीच पाया गया, जो सामान्य स्तर से कम है। कांधला में 1800 में से 1369 नमूने, शामली में 1900 में से 1408, थानाभवन में 2000 में से 1417 और ऊन में 2000 में से 1434 नमूनों में भी जीवांश कार्बन कम मिला है।
कुल मिलाकर पांचों ब्लॉकों के 10 हजार नमूनों में से 7333 में कार्बन की कमी दर्ज की गई है, जो कृषि उत्पादन के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है। कैराना प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. मोहनलाल के अनुसार जीवांश कार्बन मिट्टी की जान होता है। यह मिट्टी को भुरभुरा बनाए रखने, पानी रोकने और पौधों तक पोषक तत्व पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से मिट्टी धीरे-धीरे कठोर और कमजोर होती जाती है तथा उसकी उपजाऊ क्षमता घटने लगती है। संवाद
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रासायनिक खाद, कीटनाशकों का प्रयोग है प्रमुख कारण
जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव और कैराना प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. मोहनलाल ने बताया कि लगातार रासायनिक खाद, कीटनाशकों का उपयोग और फसल अवशेष जलाने की प्रवृत्ति के कारण मिट्टी में कार्बन घट रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जैविक खेती की ओर बढ़ें और रासायनिक खाद का उपयोग सीमित करें।
उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार ने बताया कि जीवांश कार्बन कम होने से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की गतिविधि घट जाती है, जिससे पोषक तत्वों का प्राकृतिक चक्र प्रभावित होता है और जमीन की उर्वरक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। उनके अनुसार जीवांश कार्बन सामान्य तौर पर 0.6 से 0.8 स्तर पर होना चाहिए

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
फसल अवशेष जलाना पूरी तरह बंद करें
ढैंचा, सनई जैसी हरी खाद का प्रयोग करें
गोबर खाद व वर्मी कंपोस्ट अपनाएं
फसल चक्र बदलकर दलहनी व तिलहनी फसलें शामिल करें
संतुलित मात्रा में ही रासायनिक खाद का उपयोग करें
समय-समय पर मिट्टी की जांच कराएं
सॉयल हेल्थ कार्ड जरूर बनवाएं
इनसे सीखें
भैंसवाल गांव के किसान उमेश पंवार पिछले आठ वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि देसी खाद, फसल चक्र और बिना रासायनिक दवाओं के उपयोग से मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रहती है और लागत भी कम आती है। कृषि विभाग अब ऐसे प्रगतिशील किसानों को आगे लाकर अन्य किसानों को जागरूक करने की तैयारी में है।
अवश्य बनवाएं सॉयल हेल्थ कार्ड

अधिकारियों के अनुसार, किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड अवश्य बनवाना चाहिए। इसके लिए नजदीकी कृषि विभाग, ब्लॉक कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। वैज्ञानिक खेत में अलग-अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने लेते हैं। इन्हें जियो टैग किया जाता है। साथ ही हर खेत स्वस्थ रहे पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण भी किया जा सकता है। दो-तीन वर्ष के चक्र में मुफ्त कार्ड दिया जाता है।
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