कांधला में रावण का पुतला तैयार करते कारीगर
बागपत जिले के असारा गांव के साबिर का परिवार हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल है। यह परिवार पिछले 50 सालों से शामली के कांधला, कैराना, बागपत के अलावा हरियाणा के फरीदाबाद, चंडीगढ़, अंबाला, गुरुग्राम आदि में रावण, कुंभकर्ण आदि के पुतले तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि पुतले बनाने में यह कमेटी के पदाधिकारियों से रुपये तय नहीं करते हैं। बकौल साबिर चार साल में पुतले बनाने का खर्च 30 से बढ़कर 60 से 70 हजार तक पहुंच गया है।
कोरोना काल से पूर्व कुंभकरण व रावण दोनों के पुतले बनाए जाते थे, लेकिन कारीगरों के अभाव में अब एक रावण का पुतला ही बनाया जाता है। शाबिर अली ने बताया कि पहले टीम अधिक होती थी, जिसके कारण रावण व कुंभकरण के पुतले तीन से चार दिन में टीम तैयार कर देती थी। अब समय छह से सात दिन तक लग रहा है।
फरीदाबाद, अंबाला, गुरुग्राम की रामलीलाओं में भी उनके बनाए पुतले ही जाते हैं। जिसके लिए साथी जुटे हुए हैं। शाबिर ने बताया कि समय के साथ पुतले बनाने का खर्च भी बढ़ता जा रहा है। पहले रावण का पुतला बनाने में 30 हजार का खर्च आता था अब 60 से लेकर 70 हजार रुपये तक खर्च आ रहा है।
जब तक शरीर में जान, बनाते रहेंगे पुतले
साबिर ने बताया कि उनका प्रयास रहता है कि दिन में पुतला बनाने का प्रयास किया जाए और रात के समय परिवार के लोग रामलीला को न सिर्फ देखें बल्कि राम, लक्ष्मण से लेकर अन्य के किरदारों की सत्य पर चलने वाली बातों को जीवन में उतारने का प्रयास किया जाता है। लोगों को भी राम और अन्य की तरह सच्चाई की राह पर चलने की अपील करते हैं।
50 फुट ऊंचा पुतला किया जा रहा तैयार
कांधला में कारीगर 50 फुट ऊंचा रावण और अन्य का पुतला तैयार करने में जुटे हुए हैं। पुतला दहन को देखने के लिए कांधला में आसपास क्षेत्र से काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं।