शामली। यूक्रेन में फंसे कई छात्र-छात्राओं को पिछले 24 घंटे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिले के रहने वाले 10 छात्र पोलैंड और रोमानिया पहुंच गए हैं और फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। जबकि छह छात्र अभी यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। जिसके चलते उनके परिजन चिंतित हैं।
शहर के रहने वाले अंश, मानवी, आदी, जवेरिया, कुशाग्र और मयंक अब रोमानिया पहुंच गए हैं। जल्द ही उन्हें फ्लाइट मिलने की उम्मीद है। कैराना की रहने वाली अंजलि रेलवे स्टेशन पर फंस गई हैं। ऊंचा गांव निवासी हिमांशु बस में हंगरी जाने के लिए सवार हो चुका है। जलालाबाद निवासी ईशु और ईशा रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा कांधला के नाला गांव निवासी शिवानी मीकोलाइव में होस्टल के बेसमेंट में फंसी हुई हैं।
चौसाना क्षेत्र के जहांगीर पोलैंड पहुंच गया है और जुल्फकार पश्चिमी यूक्रेन में है। वहां युद्ध का असर कम है। इन दोनों ने वापस न आने की इच्छा जाहिर की है। झिंझाना क्षेत्र के प्रशांत कश्यप को बस मिल गई है। वह भी बॉर्डर की ओर रवाना हो गया है। प्रशासन परिजनों के संपर्क में है और भारतीय दूतावास से संपर्क करके सभी छात्र-छात्राओं को सुरक्षित घर लाने का प्रयास में जुटा है।
बर्फबारी में गुजारे 22 घंटे, पीने का पानी भी जम गया
शामली। शहर के रहने अंश, मानवी, आदी, जवेरिया, कुशाग्र और मयंक शनिवार रात रोमानिया बॉर्डर पर फंस गए थे। 22 घंटे इन्होंने शून्य से 6 डिग्री कम तापमान में खुले आसमान के नीचे बिताए। इस दौरान पीने का पानी तक जम गया था। कुछ लोगों ने जबरन बॉर्डर पार करने का प्रयास किया, तो रोमानिया की सेना ने रबड़ बुलेट से फायरिंग कर दी थी। आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। जिससे वहां भगदड़ मच गई थी। रविवार की देर रात किसी तरह उन्हें रोमानिया में प्रवेश मिला। अब ये छात्र वहां कैंप में हैं और फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। जिससे उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।