दहेज और फिजूल रस्मों के खिलाफ आवाज
मौलाना ने कहा कि आज गमी और खुशी के मौकों पर ऐसी रस्में निभाई जा रही हैं जो इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ हैं। दहेज प्रथा और गैरजरूरी खर्च समाज को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से दहेज-मुक्त समाज बनाने और सादगी अपनाने का आह्वान किया।
फसाद नहीं, माफी है असली कमाल
अपने संबोधन में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि फसाद करना कोई कमाल नहीं है, बल्कि माफ करना ही असली बहादुरी और कमाल है। उन्होंने आपसी झगड़े खत्म कर भाईचारे और अमन के साथ रहने की अपील की।
मदरसा जामिया बदरुल उलूम में सालाना जलसा
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