बाबरी क्षेत्र के गांव गोगवान जलालपुर में आंधी तूफान से गिरा तिरपाल से बना मकान।
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तेज आंधी-बारिश ने उजाड़ा आशियाना
शामली। यूं तो प्रदेश सरकार अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दम भरती है, लेकिन जब ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं तो सरकार के दावे और हकीकत में फर्क साफ नजर आता है। बाबरी थाना क्षेत्र के गांव गोगवान जलालपुर में 21 वर्षीय निधि अपनी 50 वर्षीय मां कविता के साथ गांव के बाहर खाली पड़े प्लाट में झोपड़ी डालकर रह रही है। सोमवार को आई तेज आंधी में उसका घास फूस से बना आशियाना उजड़ गया है। अब उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है।
निधि ने बताया कि उसके पिता की करीब पांच साल पहले मौत हो चुकी है। उनके घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा। उसका एक भाई जिसकी उम्र 23 वर्ष है, बाहर मजदूरी करता है। वह अपनी मां के साथ यहां झोपड़ी में रहती है। मां-बेटी गांव वालों के यहां कामकाज कर रोजी रोटी का जुगाड़ करती हैं। लाख कोशिश करने के बाद भी उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। कई बार उन्होंने अपना मकान बनवाने और कई अन्य योजना के लिए ग्राम प्रधान सहित सरकारी अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन उन्हें आजतक लाभ नहीं मिला है। इस संबंध में थाना भवन बीडीओ अजय कुमार ने बताया कि यदि ऐसा है तो जांच कर पात्र को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।