शामली। दोस्ती ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही चेहरे पर खुशी छा जाती है। यूं तो दुनिया में रिश्ते बहुत है, लेकिन मित्र ही ऐसे होते हैं जो खुशी हो या गम हर परिस्थिति में एक दूसरे का साथ देते हैं। जब परिवार और रिश्तेदार मुंह फेर लेते हैं, उस समय भी दोस्त ही एक दूसरे का सहारा बनते हैं। दोस्ती का रिश्ता ही ऐसा है जो हम खुद चुनते हैं। इस रिश्ते को बनाने में किसी का दबाव या बंधन नहीं होता। यह रिश्ता स्वतंत्र होते हुए भी जिंदगी भर साथ निभाता है। ऐसी मित्रता समाज में मिसाल के रूप में जानी जाती है। मित्रता दिवस पर मित्रों और मित्रता के पावन रिश्ते को सलाम करते हुए पेश है रिपोर्ट...
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समाज में कई बदलाव आए, पर 30 साल की मित्रता नहीं बदली
शामली के मोहल्ला दयानंद नगर निवासी वीवी इंटर कालेज में प्रवक्ता डॉ. अनुराग शर्मा व सलेक विहार निवासी दवा विक्रेता अरमान राणा की मित्रता करीब 30 साल से चल रही है। अनुराग शर्मा और अरमान राणा ने बताया कि उनकी मित्रता 1990 में खेल के मैदान में क्रिकेट खेलने के दौरान हुई थी। यह संबंध खेल के मैदान व स्कूल से निकलकर परिवार के स्तर तक आ गए। तब से लेकर आज तक वह संबंध प्रगाढ़ रूप में निरंतर चले आ रहे हैं। एक दूसरे की भावनाओं का समझने के साथ सदैव सुख दुख में एक दूसरे के साथ परिवार बनकर दोनों भाई की तरह एक दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। 1990 से अब तक कई सामाजिक रूप बदलते रहें, लेकिन उनकी मित्रता पर उसका कभी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। मित्रता दिवस पर उन्हें अपनी दोस्ती पर गर्व की अनुभूति हो रही है।
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35 साल से चल रही आशुतोष-सुरेश की दोस्ती बनी मिसाल
शामली के मोहल्ला दयानंद नगर निवासी पालिका सभासद आशुतोष पंवार और मोहल्ला कृष्णा नगर निवासी कास्मेटिक की दुकान करने वाले सुरेश सैनी की दोस्ती करीब 35 साल से चल रही है। मूल रूप से गांव नौनांगली निवासी आशुतोष ने बताया कि जब से वे शामली आए हैं, उसी समय सुरेश सैनी से संपर्क हुआ और वे आपस में दोस्त बन गए। तब से वे हर सुख-दुख, शादी विवाह, तीज त्योहार कुछ भी साथ ही रहते हैं। दोनों के बीच कभी कोई फर्क नहीं आया और दोनों परिवारों में घर की तरह आना-जाना होता है।
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ईद हो या दिवाली साथ मनाते हैं सागर-रमीज
कैराना। गम हो या मुसीबत अथवा खुशी के पल हो, दोस्त हर समय साथ खड़े होते हैं। कैराना में सागर चौहान और रमीज चौधरी की दोस्ती मिसाल बनी है। कस्बे के मोहल्ला आलकला निवासी सागर चौहान पढ़ाई पूरी कर जॉब की तैयारी कर रहा है। सागर का मुस्लिम दोस्त रमीज चौधरी भी एलएलबी करने के बाद जॉब की तैयारी में है। दोनों दोस्त ईद हो अथवा दिवाली एक साथ मिलकर मनाते हैं। रक्षा बंधन पर रमीज अपने दोस्त सागर की बहनों से राखी बंधवाता है। रमजान के दिनों में सागर भी रमीज की बहन को ईदी जरूर देता है। सागर ने बताया कि रमीज उसके सगे भाई के समान है, तो वही रमीज ने भी कहा हम अलग-अलग वर्ग के भले ही हो, लेकिन एक-दूसरे में दोनों की जान बसती है।
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हर किसी की जुबानी सूरज-काकू की दोस्ती
कस्बा थानाभवन के रहने वाले सूरज कुमार औश्र काकू कोचर उर्फ पवन की दोस्ती कस्बे में हर किसी की जुबान पर रहती है। कस्बे में अक्सर इन दोनों दोस्तों को एक साथ उठते बैठते, खाते व घूमते देखा जाता है। काकू ने बताया कि वर्ष 2004 में जब उसका व्यवसाय कर्ज में डूब गया था। उस समय सूरज दिल्ली में काम करता था। उस कर्ज के दौर में अपनों ने भी साथ छोड़ दिया था और वह मानसिक तनाव में आ गया। उस समय सूरज ने उसे दिल्ली बुलाया। साथ बैठकर काफी समझाया और उसकी मदद की। तब कुछ समय बाद वह तनाव से बाहर आ सका। इतना ही नहीं कोरोनाकाल में उसके पिता की मौत हो गई। उस समय जब रिश्तेदार भी उससे मुंह मोड़ बैठे थे। तब एक सूरज ही था जो उसके साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा था। इसी तरह सूरज का भी कहना है कि हर मुसीबत के दौर में उसके साथ काकू खड़ा नजर आया। इन दोनों की दोस्ती की कहानी कस्बे में एक मिसाल से कम नहीं है। काकू का हलवाई का काम है तो सूरज रेडीमेड कपड़े मैन्युफैक्चरिंग का काम करता है।
शामली अनुराग शर्मा व अरमान राणा- फोटो : SHAMLI
ैराना में दोस्त सागर चौहान व रमीज चौधरी- फोटो : SHAMLI
थानाभवन में एक साथ खाना खाते काकू कोचर व सूरज- फोटो : SHAMLI