शामली। स्वतंत्रता आंदोलन में कस्बा थानाभवन का बड़ा योगदान रहा है। 1857 में अंग्रेजी सेना ने थानाभवन पर हमला किया था। आजादी के दीवानों ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया था और कस्बे में घुसने नहीं दिया था। इसमें अंग्रेजों को हार का सामना करना पड़ा था।
यह बात 1857 की है, जब आजादी के दीवानों ने शामली तहसील को जलाकर बर्बाद कर दिया था। तहसील को जलाने के बाद से अंग्रेज गुस्से में थे। तहसील जलाने में शामली के चौधरी मोहर सिंह के साथ थानाभवन व जलालाबाद के स्वतंत्रता सेनानी शामिल रहे थे। तहसील जलाने का बदला लेने के लिए अंग्रेजों ने थानाभवन में हमला किया था। अंग्रेजी सेना 19 सितंबर 1857 को थानाभवन पहुंच गई थी और रेती दरवाजे के सामने अपना तोपखाना लगा दिया। इसकी जानकारी मिलते ही थानाभवन के स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनकारी दो तोपों के साथ कस्बे की चहारदीवारी पर तैनात हो गए और अंग्रेजी सेना का डटकर मुकाबला करते हुए उन पर गोले दागे। अंग्रेज समझ रहे थे कि थानाभवन तबाह मिलेगा, लेकिन इसका उल्टा हुआ। अंग्रेजी फौज को परास्त होकर लौटना पड़ा। इस लड़ाई में थानाभवन के बहुत से लोग मारे गए थे।
अंग्रेजों समझ चुके थे कि पूरी तैयारी किए बिना थानाभवन को जीत पाना आसान नहीं है। सितंबर के आखिर में अंग्रेजी सेना ने पूरी ताकत के साथ थानाभवन कस्बे पर फिर हमला बोल दिया। इस बार मुकाबले में कस्बे के लोगों का गोला-बारूद खत्म हो गया, जबकि अंग्रेजों की तोप के गोले कस्बे में गिराती रही। बताया कि अंग्रेजी सेना को भारी पड़ता देख महिलाओं व बच्चों को रात के अंधेरे में दूसरी जगह भेजा गया और लोग छिपते-छिपाते रामपुर, गंगोह, कांधला आदि स्थानों पर चले गए थे। इसके बाद अंग्रेजी सेना कस्बे में दाखिल हुई थी। अंग्रेजी सेना ने मकानों को आग लगा दी थी और करीब 132 लोगों को गिरफ्तार करके महाजनों वाली बगीची में फांसी पर लटका दिया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले आजादी के दीवानों की बहादुरी को कस्बे के लोग आज भी याद करते हुए अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं।
असगरी बेगम को जिंदा जला था दिया
असगरी बेगम को अंग्रेजों ने पकड़कर जिंदा जला दिया था। ठाकुर नवल सिंह व हरनाम सिंह को भी फांसी दी गई, जबकि हिमाचल सिंह को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाकर काला पानी भेज दिया था। हाजी इमदादुल्ला, मौलाना कासिम और मौलाना रशीद अहमद गंगोही के वारंट जारी किए गए। उन पर शामली तहसील को बर्बाद करने और और थानाभवन फसाद के जिम्मेदार होने का आरोप लगाया गया था।