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पूर्णकालिक से अंशकालिक हो गई छह शिक्षिकाएं

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पूर्णकालिक से अंशकालिक हो गई छह शिक्षिकाएं
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शामली। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में नए शासनादेश के तहत जनपद मेें छह शिक्षिकाएं पूर्णकालिक से अंशकालिक हो गईं हैं, जबकि तीन शिक्षिकाएं अंशकालिक से पूर्णकालिक पद पर समायोजित हुईं।
जनपद में बनत, पंजीठ, भभीसा और ऊन में चार कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय संचालित हैं। इन चारों विद्यालयों में 350 छात्राओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण है। विद्यालयों में चार वार्डन समेत कुल 57 पद के सापेक्ष 49 पद पर नियुक्ति है जबकि एक वार्डन, छह शिक्षिकाएं और एक अकाउंटेंट का पद रिक्त चल रहा है। विद्यालयों में वर्तमान में तीन वार्डन, पूर्णकालिक 12 और अंशकालिक नौ शिक्षिकाएं नियुक्त हैं। जारी हुए नए शासनादेश में अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान को मुख्य विषय के रूप में पूर्णकालिक वर्ग में रखा गया है जबकि शारीरिक शिक्षा, कंप्यूटर, कला एवं क्राफ्ट और गृह विज्ञान को गौण (सहायक) मानते हुए अंशकालिक वर्ग में रखा गया है। विषय वर्ग के अनुसार शिक्षिकाओं की संविदा तय की गई है। नई नियमावली के तहत जनपद में शारीरिक शिक्षा और कंप्यूटर विषय की तीन-तीन यानि छह शिक्षिकाओं की संविदा पूर्णकालिक से अंशकालिक कर दी गई है जबकि हिंदी और गणित विषय में तीन की संविदा अंशकालिक से पूर्णकालिक हो गई है। इसके अलावा इन विद्यालयों में पुरुष शिक्षक की नियुक्ति न होने का भी शासनादेश मिलने पर एक मात्र शिक्षक का नए सत्र में नवीनीकरण नहीं किया गया है।
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पहले था 22 मानदेय, अब मिल रहा 9800
बनत में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नियुक्त शिक्षिका रुड़की निवासी सेठो देवी ने बताया कि उनकी नियुक्ति जुलाई 2010 में शारीरिक विषय के लिए पूर्णकालिक पद पर हुई थी, तब से वह यहां पर कार्यरत हैं। उन्हें 22 हजार रुपये मानदेय मिल रहा था। 10 साल बाद उन्हें अंशकालिक शिक्षिका का पत्र मिला है। अब मानदेय 9800 रुपये कर दिया गया। इतने कम मानदेय में परिवार का खर्च नहीं चल सकता। इसके अलावा कई अन्य समस्याएं भी खड़ी हो गई हैं। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए।
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सहारनपुर निवासी स्नेहलता ने बताया कि वह 2016 से बनत के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में पूर्णकालिक कंप्यूटर शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। कुछ दिन पहले उन्हें अंशकालिक होने का पत्र मिला। अब मानदेय इतना कम हो गया कि उसमें परिवार का पालन करना संभव नहीं। सहारनपुर से रोज आना-जाना नहीं किया जा सकता। विद्यालय से बाहर किराये के मकान में रहना आज के माहौल में महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। इसलिए उनके सामने कई तरह की समस्याएं आ गईं हैं।
कोट
जनपद के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में नए शासनादेश के अनुसार शिक्षिकाओं की अंशकालिक और पूर्णकालिक पदों पर नियुक्ति की गई है।
-राजीव सिंह, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा।
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