दिनभर रख सकते हैं व्रत
इस स्थिति में आप 31 अगस्त को प्रात: 09 बजकर 44 मिनट के बाद पारण कर सकते है, क्योंकि इस समय ही रोहिणी नक्षत्र का समापन होगा। जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले लोग मुख्यत: दिनभर व्रत रखते हैं। रात्रि में बाल गोपाल श्रीकृष्ण के जन्म के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं, उसी समय अन्न ग्रहण करके व्रत का पारण कर लेते हैं। हालांकि कई स्थानों पर अगले दिन प्रात: पारण किया जाता है।
इस दिन सूर्य और मंगल लग्न में स्थित सिंह राशि में रहेंगे। चंद्र और राहु कर्म भाव में वृषभ राशि में और केतु वृश्चिक चतुर्थभाव में रहेंगे। शुक्र और बुद्ध दूसरे भाव में कन्या राशि में रहेंगे। शनि छठे भाव में मकर राशि में रहेंगे और गुरु सप्तम भाव में कुंभ राशि में रहेंगे। इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूजा मुहूर्त 30 अगस्त की रात 11 बजकर 59 मिनट से देर रात 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। बाल-गोपाल के पूजा की कुल अवधि 45 मिनट है।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन शुभ संयोग
आनन्दादि योग सुस्थिर- 06:39 प्रात: के बाद वर्धमान।
सर्वार्थसिद्धि योग- अगस्त 30 06:39 प्रात: से अगस्त 31 06:12 प्रात: व्याघात योग 29 अगस्त 06:44 प्रात: से 30 अगस्त 07:46 प्रात: इसके बाद हर्षण योग अगस्त 30 07:46 प्रात: से 31 अगस्त 08:48 प्रात: तक रहेगा।
-निशित काल 30 अगस्त रात 11:59 से लेकर सुबह 12:44 तक और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:56 से लेकर दोपहर 12:47 तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 06:32 से लेकर शाम 06:56 तक रहेगा।
व्रत पारायण (समाप्त) का समय
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत पारायण का समय 31 अगस्त को सुबह 09 बजकर 44 मिनट के बाद ही कर सकते हैं। इस समय ही रोहिणी नक्षत्र समाप्त होगा।