शामली। दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन 1008 इंद्र ध्वज महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ में जैन मुनि ज्ञान भूषण महाराज ने मार्दव धर्म के बारे में बताया कि जीव में कोमलता, नम्रता और झुकने की कला ही मार्दव धर्म है। चार दिन की जिंदगी में कभी अहंकार-घमंड नहीं करना चाहिए।
शनिवार को फव्वारा चौक हाथी खाना में दूसरे दिन मध्यप्रदेश के बनारसी छिंदवाड़ा से आए विधान आचार्य पंडित शरद चंद्र ने यज्ञ नायक भूषण लाल जैन, डॉक्टर अनीता जैन, सौधर्म इंद्र मयंक जैन, प्रियंका जैन, कुबेर महेश चंद जैन, कमल जैन, इशान, इंद्र और इंद्राणियों को विधि विधान से पूजा अर्चना कराई। जैन आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने कहा कि धर्म की पताका को फहराओ, जो जीवन में सुख शांति को प्रदान करता है। मनुष्य को बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करना होगा।
मनुष्य को हमेशा जीवन में झुकना आना चाहिए। मनुष्य को झुकने से कई लाभ दिखाई पड़ते हैं। महाराज श्री ने कहा कि धर्म में रुकावट पैदा करने वाला महादोषी होता है। मनुष्य को अपने अंदर कोमलता और नम्रता लानी है। चार दिन की जिंदगी में कभी अहंकार-घमंड नहीं करना चाहिए। इस मौके पर प्रवीण जैन, अशोक जैन, मंजु जैन, शांति देवी जैन, राजीव जैन, सुशील, सुखपाल चंद जैन, जिनेंद्र जैन, कमल जैन, अमित जैन, रवि जैन, मोहित जैन, अरविंद जैन, अंकुर जैन, अमर जैन, प्रवीण जैन आदि मौजूद रहे।