जिले में अलग-अलग स्थानों पर घर में दो महिलाओं ने सांप ने डस लिया। परिजन बिना देरी किए अस्पताल ले गए। समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलने से दोनों महिलाओं की जान बच गई। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश पीड़िता को बिना कोई देरी किए अस्पताल लाकर उपचार कराना चाहिए। झाड़फूंक व अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर जान जा सकती है।
झिंझाना थानाक्षेत्र के गांव श्यामली शामला निवासी माया (45) बुधवार रात करीब तीन बजे चारपाई से शौच के लिए उठी थी। चप्पल पहनते समय सांप ने महिला के पैर में डस लिया। सर्पदंश से उसके पैर में तेज दर्द हुआ। उसने देखा तो चप्पल में सांप का बच्चा लिपटा हुआ था। उस समय सर्प मृत अवस्था में था। माना जा रहा है कि चप्पल पहनते समय पैर के नीचे दबने से उसकी मौत हो गई। महिला के पति विनोदपाल ने मृत सांप के बच्चे को पॉलिथीन में डाल लिया।
इसके बाद महिला को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने भर्ती कर एंटी वेनम व अन्य दवा देकर उपचार दिया। पति ने चिकित्सक को बताया कि वह मृत सर्प के बच्चे को इसलिए लाया है कि उसने सुना था कि चिकित्सक सांप के रंग और प्रजाति के बारे में पूछते हैं, ताकि समय पर सही और उपचार मिल सके। उपचार के बाद महिला की हालत सामान्य होने पर दोपहर बाद घर भेज दिया।
उधर, कांधला थानाक्षेत्र के गांव गंगेरू के मोहल्ला धोबियान निवासी शकीला (55) पत्नी वकील को दोपहर के समय घर में खाना बनाते समय सांप ने डस लिया। सांप के डसने पर शकीला की चीख निकल गई। उसके माथे से ऊपर सिर में सांप ने डसा था। परिजनों ने सांप को मार दिया। इसके बाद परिजन शकीला को गांव में झाड़फूंक करने वाले व्यक्ति के पास ले गए।
शकीला के बेटे साजिद ने बताया कि हालत गंभीर होने के कारण झाड़फूंक करने वाले ने इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां से महिला को प्राथमिक उपचार के बाद मेरठ मेडिकल रेफर कर दिया। साजिद ने बताया कि मेरठ अस्पताल में मां की हालत अब स्थिर बनी हुई है। उनका उपचार चल रहा है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. किशोर कुमार आहूजा ने बताया कि सांप के डसने पर मरीज को बिना देरी किए जल्दी से जल्दी अस्पताल ले जाना चाहिए। अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में निशुल्क उपलब्ध हैं।