राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा दिल्ली-शामली, सहारनपुर मार्ग के शामली बाईपास के लिए खरीदी गई भूमि का अधिग्रहण शुरू कर दिया है। मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बागपत की इकाई की टीम ने बलवा गांव में जेसीबी चलाकर खेतों की भूमि का खाली कराया गया। एडीएम के मुताबिक शामली बाईपास के लिए किसानों से खरीदी गई भूमि को अधिग्रहण कराया जाएगा। बाईपास की अधूरी भूमि के बैनामे कराकर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
सोमवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में डीएम अखिलेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की बैठक हुई थी। जिसमें शामली बाईपास की खरीदी गई भूमि का अधिग्रहण करने का निर्णय लिया गया था। गौरतलब है कि दिल्ली-यमुनोत्री, शामली, सहारनपुर मार्ग के शामली बाईपास के लिए बलवा, सिंभालका, शामली, सेहटा, बनत के 158 किसानों की भूमि बैनामे उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण की देखरेख में हुए थे। बनत समेत 24 किसानों के बैनामे अधूरे रहे गए थे। बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नई दिल्ली ने बागपत इकाई स्थापित करके इस हाईवे के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने दिल्ली-यमुनोत्री राजमार्ग को दो चरणों में निर्माण करने के टेंडर छोड़े गए।
प्रथम चरण में बागपत से शामली, और शामली से सहारनपुर का निर्माण शामिल है। एक साल पूर्व केंद्रीय परिवहन राज्य नितिन गडकरी ने गत 27 मई को बागपत में शामली बाईपास का कार्य जुलाई माह में शुरू करने का आश्वासन दिया था। मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अभियंता अवनीश पराशर, सत्यप्रकाश तिवारी, मनमोहन चौबे, राहुल दूबे ने बलवा के पास शामली बाईपास के लिए खरीदी गई भूमि में जेेेसीबी चलाकर खाली कराना शुरू कर दिया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व आनंद शुक्ला ने बताया कि शामली बाईपास की कुल 36 हेक्टेयर भूमि में से 31 हेक्टेयर भूमि के बैनामे पूूूरे हो चुके हैं। शामली बाईपास की जद में आई किसानों ने भूमि के बैनामे की सहमति दे चुके है। जल्द ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी अधूरे बैनामो की प्रक्रिया को पूरा करा पाएंगे।
अधिग्रहण न होने से किसान कर रहे थे खेती
शामली बाईपास के लिए किसानों से भूमि खरीदने की गत छह साल पहले शुरू हो गई थी। शामली बाईपास की जद में 158 किसानों के खाते में धनराशि भेजकर बैनामे की प्रक्रिया पूूरी करा दी गई थी। भूमि अधिग्रहण न होने से बलवा, सिंभालका, सेहटा गांव के किसान खेती कर रहे थे।