कैराना मामौर झील पर वेट लैंड बनाने हेतू निरीक्षण करते वन अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक व वन रेंज?
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वन अनुसंधान केंद्र देहरादून के वैज्ञानिकों ने मामौर झील का किया निरीक्षण
कैराना (शामली)। मामौर झील पर वेट लैंड बनाने, पौधरोपण करने एवं पक्षियों को रखने के लिए देहरादून वन अनुसंधान केंद्र से पहुंचे वैज्ञानिकों की टीम और वन विभाग के अधिकारियों ने मामौर झील का निरीक्षण किया।
बुधवार को वन अनुसंधान केंद्र देहरादून से वैज्ञानिक मनीष देव अपनी तीन सदस्य टीम के साथ मामौर झील पर पहुंचे। टीम के साथ वन रेंजर धर्मवृत्त आर्य भी थे। टीम ने मामौर झील का गहनता के साथ निरीक्षण किया। वन रेंजर धर्मवत्त आर्य ने बताया कि जल संचय नीति के तहत जल संरक्षण अभियान एवं वृक्षारोपण की वृहद कार्य योजना के तहत झील का निरीक्षण किया गया। यमुना के पांच किलोमीटर के दायरे में वेट लैंड का संवर्धन एवं संरक्षण किया जाएगा। वेट लैंड के लिए मामौर झील उपयुक्त पाई गई है। वेट लैंड के चारों और घूमने का रास्ता बनाया जाएगा जिस पर खड़े होकर लोग वेट लैंड में पक्षियों की चहचहाट सुन सकेंगे। वृहद कार्य योजना (डीपीआर) के निर्देशों के क्रम में मामौर झील पर वेट लैंड बनाने के लिए चारों ओर रास्ते के अलावा वेट लैंड के चारों और एक लाइन में हाइट्स प्रजाति जैसे पीपल बरगद के पेड़ लगाए जाएंगे। वेट लैंड के अंदर चार या पांच आईलैंड होंगे, जिनमें अर्जुन, बबूल एवं खजूर के पौधे लगाए जाएंगे ताकि इन वृक्षों पर पक्षी विचरण कर सकें।
-झील के गन्दे पानी के शुद्धिकरण हेतु जमीन देखी
वन रेंजर धर्मवृत्त आर्य ने बताया कि कैराना से नाले द्वारा झील में आने वाले गंदे पानी के शुद्धिकरण (एसटीपी) की स्थापना सिंचाई विभाग द्वारा कराई जाएगी। जिसके लिए सिंचाई विभाग ने मवी के किसान की एक हेक्टेयर जमीन देखी है।
कोट
मामौर झील पर वेट लैंड बनाने के लिए देहरादून से वन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक मनीष देव आये थे। उन्हें जमीन वेट लैंड के लिए अच्छी लगी। जल्द ही प्रस्ताव बना कर शासन को भेजा जाएगा।
- धर्मवृत्त आर्य, वन रेंजर