थानाभवन। मेला ग्राउंड स्थित रविदास मंदिर प्रांगण में चल रही सात दिवसीय संगीतमय रविदास कथा ज्ञान चर्चा के पांचवें दिन शनिवार की शाम को कथा वाचक कपिल गोड़िया ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास बेहद परोपकारी, दयालु संत थे। उन्होंने सभी को मिल-जुलकर रहने की प्रेरणा दी।
कथा वाचक ने कहा कि संत रविदास को बचपन से ही दूसरों की सहायता करना उनका स्वभाव बन गया था। उनके इस स्वभाव के कारण माता-पिता उनसे अप्रसन्न रहते थे। कुछ समय बाद उन्होंने रविदास व उनकी पत्नी को घर से अलग कर दिया। तब संत रविदास पड़ोस में ही अपने लिए एक अलग झोपड़ी बनाकर व्यवसाय करने लगे। शेष समय ईश्वर-भजन, साधु-संतों के सत्संग में व्यतीत करते थे। संत रविदास ने अपनी वाणी में ऊंच-नीच की भावना, ईश्वर भक्ति के नाम पर किए जाने वाले विवाद को सारहीन व निरर्थक करार दिया है। उन्होंने सभी को मिलजुल कर रहने की प्रेरणा दी।
कपिल गोड़िया ने कहा कि इंसान अपने कर्मों से बड़ा होता है। इस अवसर पर डॉ. भीम राव आंबेडकर ज्ञान प्रचार मंडल सहारनपुर से महात्मा प्रकाश दास, महात्मा शेर सिंह दास, शुभम, नीटू, प्रवीण, आर्यन, अक्षय, सुधीर, ऋषिपाल विकसित, प्रवीन कुमार, बालकिशन आर्य, अमित सैनी, शुभम, ऐप्पल कुमार, देशराज, रणभीर, आकाश,अभिषेक आदि महिलाएं और पुरुषों ने धर्म लाभ उठाया।