झिंझाना। मेरठ में पकड़ा गया नकल माफिया अरविंद राणा मूल रूप से झिंझाना के गांव बझेड़ी का रहने वाला हैै। ग्रामीणों के अनुसार उसने इंटर के बाद बड़ौत में वर्ष 1999 में राणा कोचिंग सेंटर में कोचिंग लेते हुए वहीं से स्नातक किया था। इसके बाद 2003 में वह राणा कोचिंग सेंटर से जुड़ा था। तब से उनकी पहचान अरविंद राणा के रूप में हो गई। ग्रामीणों के अनुसार इसका गोत्र दलाल है। इस सेंटर का मालिक गांव निरपुड़ा निवासी राणा थे।
अरविंद का बड़ा भाई प्रवीण दलाल है, जो गांव में रहकर खेतीबाड़ी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। उसे अरविंद के किसी कार्य से कोई लेना देना नहीं है। उसके पिता ब्रह्मपाल सिंह के पास करीब 55 बीघा जमीन है। लोगों ने बताया कि अरविंद का वर्तमान में शामली में राणा के नाम से कोचिंग सेंटर बताया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अरविंद को संभवत: किसी साजिश के तहत फंसाया गया है। अरविंद के भाई और पिता से बात करनी चाही तो आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि वह दोनों को शुगर मिल में गन्ना लेकर गए हैं।