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पूरे दिन रहा धरना प्रदर्शन, शाम को खत्म

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शामली में कैराना रोड पर अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करते विद्युत निगम के कर्मचारी - फोटो : SHAMLI
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पूरे दिन चला धरना प्रदर्शन, शाम को खत्म
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शामली। निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन विद्युत कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार जारी रहा। शाम को कार्य बहिष्कार एवं धरना, प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।
मंगलवार को खेड़ीकरमू स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर कर्मचारियों ने दूसरे दिन कार्य बहिष्कार किया। विद्युत कर्मचारियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण का विरोध किया। आंदोलन को भारतीय किसान संगठन के जिलाध्यक्ष जमील अहमद ने धरना स्थल पर आकर समर्थन दिया। शाम को धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। धरना प्रदर्शन में अधीक्षण अभियंता जेके पाल, उदय प्रताप सिंह, ब्रह्मपाल, नेकीराम, रविंद्र प्रकाश, संतोष कुमार (पारेषण), रोबिन सिंह (पारेषण), अरुण कुमार, अर्जुन सिंह, ब्रजमोहन, अरविंद कुमार, भानू प्रताप कुशवाहा, सिकंदर यादव, अरुण कुमार (पारेषण), अजय कुमार, संजीव सौरभ, राजीव कुमार, लेखा संघ से सत्यव्रत, विकास कुमार, ललित कुमार, मीनू, नेहा, मुकेश देवी, रीना, सत्यवेंद्र सिंह, जुगेंद्र सैनी, अवधेश सैनी, शिव कुमार, सुमित कुमार, कैलाश चंद, सतीश कुमार, लोकेश कुमार आदि मौजूद रहे। समिति के संयोजक उदय प्रताप ने बताया कि लखनऊ में मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आंदोलन को समाप्त कर दिया गया है।
कार्य बहिष्कार से आपूर्ति रही बाधित
शामली। विद्युत कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से जिले के कई बिजलीघरों की आपूर्ति ठप रही तथा बिल जमा नहीं होने से करीब एक करोड़ रुपये का राजस्व प्रभावित हुआ। शाम लखनऊ स्तर पर हुई वार्ता के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया।
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उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर जिले के बिजली कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन किया। जिससे दो दिन से 33 केवी के दस बिजलीघरों की बिजली आपूर्ति 33 घंटे से ठप रही। थानाभवन क्षेत्र के उपकेंद्र हसनपुर लुहारी, टांडा कृषि फीडर 24 घंटे से बंद चल रहा है। भैंसानी इस्लामपुर गोगवान कृषि फीडर 28 घंटे, कांधला देहात, नौजल उपकेंद्र 33 घंटे से बंद चल रहे हैं। 33 केवी बिजलीघर शामली की बिजली आपूर्ति शाम साढ़े चार बजे से ठप हो गई। जिला मुख्यालय के मंडी गांधी गंज का बिजली ट्रांसफारमर जल गया। ट्रांसफार्मर फुंक जाने से मोहल्लों में अंधेरे छाया रहा। देर रात तक आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी थी।
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तीन दिन से बिजली बिल काउंटर बंद रहने से उपभोक्ता बिल जमा नहीं कर पाए हैं। जिससे करीब एक करोड़ रुपये का राजस्व प्रभावित हुआ है। विद्युत वितरण मंडल के अधिशासी अभियंता प्रथम राजपाल रघुवंशी ने बताया कि प्रतिदिन 40-50 लाख रुपये का बिजली बिल जमा होता है। दो दिनों में लगभग एक करोड़ रुपये का राजस्व प्रभावित रहा। जिले में विद्युत व्यवस्था बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लेखपाल, अमीन, सचिव व अन्य विभाग के गैर तकनीकी कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी गई।
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