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वरिष्ठता सूची को दरकिनार कर दी गई प्रोन्नति

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शामली। कनिष्ठ शिक्षकों को नियम विरुद्ध प्रोन्नति के मामले की जांच में बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की पोल खुलकर सामने आई है। इस मामले में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची न बनाकर कनिष्ठ शिक्षकों को प्रोन्नति का लाभ दिया गया। मामले में जांच रिपोर्ट पूरी हो जाने के बाद अब संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है।
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2018 में बेसिक शिक्षा विभाग के 23 कनिष्ठ शिक्षकों को नियम विरुद्ध प्रोन्नति दिए जाने की शिकायत बनत निवासी भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अनुज राणा ने सहारनपुर मंडल के आयुक्त एवी राजमौलि से की गई थी। मंडलायुक्त के निर्देश पर बृहस्पतिवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देवेंद्र सिंह ने प्रकरण की जांच की। जांच अधिकारी ने सभी पक्षों के बयान दर्ज करने और दस्तावेजों आधार पर तत्कालीन बीएसए चंद्रशेखर, तत्कालीन बीएसए का अतिरिक्त चार्ज देख रही डीआईओएस अनुराधा शर्मा व वर्तमान बीएसए गीता वर्मा के अलावा वित्त एवं लेखाधिकारी को इस मामले में शिथिलता व लापरवाही का जिम्मेदार माना। इस मामले पर कार्रवाई की संस्तुति करते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंपी है।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची को दरकिनार किया गया और सूची तैयार न करके कनिष्ठ शिक्षकों को प्रोन्नति का लाभ दे दिया। इसके चलते करीब 80 वरिष्ठ शिक्षक प्रोन्नति के लाभ से वंचित रह गए। वरिष्ठ शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर इस संबंध में प्रत्यावेदन भी दिया था, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते कनिष्ठ शिक्षकों का वेतन वरिष्ठ शिक्षकों से ज्यादा हो गया।
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बताया गया कि प्रोन्नति के बाद शिक्षकों के मूल वेतन में 10 से 12 हजार रुपये प्रति माह की वृद्धि हुई थी। शिक्षकों को लाखों रुपये एरियर का भुगतान भी कर दिया गया। सूत्रों से यह भी पता चला है कि प्रोन्नति पाने वाले कई शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने पर उनकी पेंशन प्रोन्नति से पहले मिलने वाले वेतन के आधार पर बनाई गई है। कुल मिलाकर इस प्रकरण में करोड़ों रुपये सरकारी धन का घपला होना बताया जा रहा है।
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तीन साल तक मामले को दबाए रहे अधिकारी
शामली। करीब तीन साल पहले नियम विरुद्ध पदोन्नति दिए जाने का मामला सामने आया था। तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने वरिष्ठ कोषाधिकारी ज्ञानेंद्र पांडेय के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई थी। उस समय 23 शिक्षकों की प्रोन्नति से संबंधित फाइल उपलब्ध नहीं हुई थी। डीएम के निर्देश पर प्रोन्नत हुए शिक्षकों के वेतन वृद्धि पर रोक लगाई गई थी। इसके विरोध में प्रोन्नत शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्टे प्राप्त कर लिया था। इस मामले में विभाग की तरफ से पैरवी नहीं की गई और न ही जवाब दाखिल किया गया। तब से यह मामला अधिकारियों की उदासीनता के कारण ठंडे बस्ते में पड़ा था।
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शासन तक पहुंचा प्रोन्नति का मामला
शामली। कनिष्ठ शिक्षकों को नियम विरुद्ध प्रोन्नति देने की शिकायत शासन से की गई है। शिकायतकर्ता अनुज राणा ने बताया कि बेसिक शिक्षा की प्रमुख सचिव ने इस प्रकरण की जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक सहारनपुर मंडल आरपी शर्मा और सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक योगराज सिंह को संयुक्त रूप से सौंपी गई है। संयुक्त शिक्षा निदेशक सहारनपुर ने पांच जुलाई को शिकायतकर्ता अनुज राणा और पांच शिक्षकों को जांच के संबंध में अपने कार्यालय में बुलवाया है।
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