शामली। शुरुआत में भाजपा के लिए मुश्किल लग रहा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जोड़तोड़ की राजनीति और बेहतर प्रबंधन के बल पर जीत के मुकाम तक पहुंच गया। इसी से भाजपा चार सदस्यों से बढ़कर बहुमत के आंकड़े तक पहुंच गई। जबकि सपा-रालोद प्रत्याशी को सात सदस्य जीतकर आने के बावजूद नौ से ज्यादा वोट नहीं मिल पाए।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा होते ही जोड़तोड़ शुरू हो गई थी। सपा-रालोद खेमा अपने पास 12 सदस्यों का समर्थन होने का दावा कर रहा था, जबकि भाजपा प्रत्याशी के चुनाव की कमान संभाल रहे कैबिनेट मंत्री भी पूर्ण बहुमत का दावा कर रहे थे। वह सदस्यों को साधने में लगे हुए थे।
एक दिन पहले ही कई सदस्य मंत्री सुरेश राणा के साथ नोएडा में थे, उन्हें सुबह ही शामली लाया गया। पूर्व मंत्री विरेंद्र सिंह का अनुभव भी चुनाव में काफी काम आया। आपसी समन्वय और जोड़तोड़ की राजनीति ने भाजपा को जीत के जादुई आंकड़े तक पहुंचा दिया। उधर मतदान के समय तक सपा-रालोद नेता 11 सदस्यों का समर्थन होने का दावा करते रहे, लेकिन नौ सदस्यों ने ही उनके पक्ष में मतदान किया।
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12 में से नौ महिलाओं ने भाजपा को दिया समर्थन
शामली। जिला पंचायत सदस्य की 19 सीटों पर 12 महिलाएं जीतकर आईं हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मतदान के लिए भाजपा नेताओं के साथ दस सदस्य मतदान करने गए थे। इनमें से नौ महिलाएं थीं। प्रत्याशी मधु के अलावा शर्मिष्ठा, नीरज, डोली, सुमन, बबली, नफीसा, फरजाना और शैफाली चौहान भाजपा खेमे के साथ मतदान करने पहुंची थीं। सपा-रालोद प्रत्याशी अंजलि के साथ दो महिला सदस्य ओमवती और सीमा पहुंची थीं।
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दो मुस्लिम सदस्यों का समर्थन भी पाया
भाजपा ने दो मुस्लिम सदस्यों का भी समर्थन हासिल किया। वार्ड दस से जीती नफीसा और वार्ड 11 से जीती फरजाना भाजपाई खेमे के साथ वोट डालने पहुंची थीं, जबकि वार्ड 12 से जीते परवेज अली और वार्ड नौ से जीते अजीम सपा-रालोद खेमे के साथ पहुंचे थे।