फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में गर्भवती महिलाएं हो रही कुपोषण की शिकार

विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। जिले में गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं। कुपोषण को रोकने के लिए शासन की तरफ से योजनाएं चलाई जा रही है। जिले में 12839 गर्भवती महिलाओं में 1180 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी यानी कुपोषित हैं, जिनके सुपोषण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
विज्ञापन

शासन की योजनाओं द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। एक सितंबर से राष्ट्रीय पोषण माह शुरू किया गया है, जिसमें कुपोषण से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने को कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पिछले वर्षों में भी सितंबर माह में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पांच साल तक के 551 अतिकुपोषित और 1614 कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में जिले में अप्रैल से अगस्त तक 12839 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हुई हैं। इनमें 1180 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) के लिए चिह्नित की गई है। एचआरपी में वे गर्भवती महिलाएं चिह्नित होती है, जिनका हीमोग्लोबीन सात ग्राम से कम होता है।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि एचआरपी में चिह्नित महिलाओं को कुपोषित श्रेणी में रखा गया है। इनके सुपोषण के लिए सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक महीने की नौ तारीख को एचआरपी डे पर जांच व उपचार की सुविधा निशुल्क दी जा रही है। इसके अलावा जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के सुपोषण के लिए उन्हें पुष्टाहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-----
गर्भवती महिलाओं के सुपोषण को स्वास्थ्य विभाग के प्रयास
सरकारी अस्पतालों में हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच और अल्ट्रासाउंड की सुविधा।
सीएचसी में सात ग्राम से कम हीमोग्लोबीन पर सीएचसी पर रक्त चढ़ाने की सुविधा।
सात से 11 ग्राम के बीच हीमोग्लोबीन पर गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज देने की व्यवस्था।
सभी गर्भवती महिलाओं को आयरन फोलिक एसिड, कैल्शियम व एलबेंडाजोल की टैबलेट का वितरण।
डिलीवरी के लिए अस्पताल लाने और बाद में घर छोड़ने के लिए परिवहन की निशुल्क सुविधा।
डिलीवरी के बाद 48 से 72 घंटे तक अस्पताल में निशुल्क भोजन की व्यवस्था।
डिलीवरी के बाद 42 दिन तक जांच के लिए घर से अस्पताल लाने व छोड़ने की परिवहन की निशुल्क सुविधा।
नवजात शिशु को एक वर्ष तक जांच व उपचार के लिए घर से लाने व छोड़ने की सुविधा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें