शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक शाखा ऊन व भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा प्रबंधक शामली के विरुद्ध वाद की सुनवाई करते हुए 5.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता को बीमा क्लेम न देने पर आयोग ने निर्णय सुनाया है।
जिले के कस्बा ऊन निवासी पुष्पा देवी ने साल 2017 में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया था। इसमें उसने अवगत कराया कि उसके पति का बचत खाता विपक्षी बैंक में संचालित था। पति के खाते के माध्यम से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत बीमा कराया गया था। इसके तहत खाते से 330 रुपये बीमा प्रीमियम भी 25 मई 2016 को विपक्षी एलआइसी ने प्राप्त किया था। इसके बाद अगले साल के लिए भी नवीनीकरण कराया गया था। 25 सितंबर 2016 को पति राजकुमार की मृत्यु हो गई। इसकी सूचना परिवादनी ने बैंक को दी, लेकिन पति की आयु 50 साल से अधिक बताते हुए बीमा धनराशि देने को असमर्थता जताई गई, जबकि उसके पति की आयु 50 वर्ष से अधिक नहीं थी। इसके बाद उसे बैंक की ओर से बताया कि गलती से बीमा दावा निरस्त हो गया है और इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। पति की जन्मतिथि के शैक्षिक दस्तावेज व साक्ष्य दिए गए।
इसके बाद पुन जांच करने वाली कमेटी के मुख्य प्रबंधक फाइनेंशियल सर्किल आफिस मुजफ्फरनगर को बैंक ने पत्र देकर स्पष्ट किया कि शैक्षिक दस्तावेज में अंकित तिथि सही है।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने फैसला सुनाया कि बीमा दावे की धनराशि दो लाख रुपये मय 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज बीमित की मृत्यु के तीन माह बाद की तिथि से अंतिम अदायगी तक दिया जाए। इसके साथ ही शारीरिक मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के एक लाख रुपये, वाद व्यय 10 हजार, अनुचित व्यापार व्यवहार पर दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। साथ ही चेतावनी दी कि 45 दिवस के भीतर धनराशि जमा न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी