कैराना। मोहर्रम का चांद नजर आने के साथ ही नगर के इमामबारगाहों व अजाखानों में मजलिसों का दौर शुरू हो गया।
कस्बे के मोहल्ला अंसारियान स्थित इमामबारगाह खुर्द व कला के साथ रजा अली खां अौर सरदार हुसैन के यहां मौलाना तहजीबुल हसन आजमगढ़, मौलाना सैयद अजादार हुसैन सेथल (बरेली) और ईरान से आए हजरत मौलाना मो. मेहंदी खिताब कर रहे हैं। वहीं वसी हैदर, इशरत हुसैन, मो. मुदस्सिर व हुसैन हैदर मरसियाख्वानी कर रहे हैं।
इस दौरान नौहाख्वानी रविश जैदी, आसिफ अली, बाकर रजा, गुलजार अली व आगाज हैदर कर रहे हैं।
इमामबारगाह खुर्द की मजलिस में खिताब करते हुए मौलाना तहजीबुल हसन ने कहा कि इमाम हुसैन ने करबला में कुर्बानी रसूले अकरम का दीन बचाने के लिए दी।
मौलाना तहजीबुल हसन ने कहा कि जनाबे मुसलिम बिन अकील करबला के पहले शहीद हैं जिन्हें जालिमो ने कुफा में शहीद कर उनकी लाश को महल पर लटका दिया था।
इस मौके पर अली हैदर जैदी, मो. हुसैन कौसर, डाक्टर सरवर हुसैन, रजा अली खां, जावेद रजा जैदी, शाह रजा, काजिम हुसैन, सईदुल हसन, राहत अली, हैदर अब्बास, इंतजार हुसैन, मो. अली, जब्बार हुसैन, अजहर हुसैन जैदी सहित भारी संख्या में शिया सोगवार मौजूद रहे। इसके अलावा कई स्थानों पर मजलिस की गई। इनमें सैकड़ों ने उपस्थिति दर्ज कराई।