ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया
शामली। माटी की सुगंध समूह द्वारा महाराणा प्रताप की जयंती पर एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। राष्ट्रीय गीतकार डॉक्टर जयसिंह आर्य ने महाराणा प्रताप की वीरता पर ओजस्वी रचनाएं सुनाईं।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता गीतकार डॉक्टर जयसिंह आर्य ने की। मुख्य अतिथि पानीपत से हरगोविंद झांब रहे। कवि सम्मेलन का संयोजन डॉ अंजलि सिसोदिया ने किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत संयोजिका अंजलि सिसौदिया ने मां सरस्वती की वंदना के साथ की। डॉ जयसिंह आर्य ने महाराणा प्रताप की वीरता को लेकर ओजस्वी रचनाएं सुनाईं, राणा जब रण में बना मुगल सैन्य का काल, भारत माता हो गई पाकर उसे निहाल। कोरोना पर उन्होंने अपनी एक रचना में कहा, दो ही गज की दूरी राखियो। मास्क भी जरूरी राखियो। बचना है कोरोना से अगर, इम्युनिटी पूरी राखियो।
हरगोविंद झाम्ब ने कहा, रोटी खाई घास की, तजा नहीं सम्मान, ऐसे वीर प्रताप का, याद रखो बलिदान। मुकेश शांडिल्य चिराग ने रचना सुनाई, स्वयं को डाल संकट में, खुशी हर बार लाए हो, झुलसती जिंदगी पर तुम, घने बादल से छाए हो। अंजलि सिसौदिया ने रचना में कहा, बड़भागी जग में माई, जिसकी कोख ने शेर जना, राणा उदय के उन महलों की, वो महाराणा शान बना। नारनौल हरियाणा की डॉ कृष्णा आर्य ने गीत सुनाया, या साड़ी किसने रंगाई हे सखी, जिसमें रंग आजादी का , एक पल्ले पर सुभाष चंद्र बोस खड़ा, जे नै जय हिंद फौज बनाई हे सखी जिस में रंग आजादी का। शामली के कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने सुनाया, उसको मृत्यु मारेगी क्या, औरों के हित जीता जो।
डॉक्टर दमयंती शर्मा, अनिल धीमान, अनीता शुक्ला, डॉ वरुण उपाध्याय, केसर कमल शर्मा, गायत्री जोशी, किशन सिंह चंदेल, राजपाल यादव राज, महेंद्र नाथ तिवारी, सीमा गुप्ता, प्रेम शर्मा और सुषमा शर्मा, नरेंद्र शर्मा खामोश ने भी कविता सुनाईं। संचालन संजय जैन ने किया।