शामली। पूर्वी यमुना नहर की पटरी चौड़ीकरण निर्माण कार्य शुरू होने में लोक निर्माण विभाग के सामने बाधा खत्म नहीं हो रही है। नवीन जिला मुख्यालय जाने वाली पूर्वी यमुना नहर की दोनों पटरी के चौड़ीकरण के निर्माण के लिए 650 पेड़ों के कटान के बदले में जिला प्रशासन को आठ हेक्टेयर भूमि वन विभाग को उपलब्ध कराया जाना था। जिले में एक स्थान पर आठ हेक्टेयर भूमि न मिलने से सहारनपुर मंडल के मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जिले में भूमि की तलाश शुरू की गई है।
पूर्वी यमुना नहर की दोनों पटरी के चौड़ीकरण के लिए 40 करोड़ रुपये लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड शामली को शासन से अवमुक्त हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग की तरफ से ठेका छोड़कर ठेकेदार नामित किया जा चुका है, लेकिन पटरियों के चौड़ीकरण का कार्य शुरू करने के लिए पहले 650 पेड़ों के कटान के लिए एक स्थान पर आठ हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने और पेड कटान की मुआवजा धनराशि जमा कराने पर वन विभाग से अनुमति मिलनी है।
पिछले एक साल से जिला प्रशासन की ओर से आठ हेक्टेयर भूमि शामली, कैराना और ऊन तहसील में अलग-अलग का प्रस्ताव वन विभाग को दिया गया था, लेकिन वन विभाग की ओर से जिला प्रशासन को आठ हेक्टेयर भूमि एक स्थान पर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए। जिले में आठ हेक्टेयर भूमि एक स्थान पर नहीं मिल पाई।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता राजकुमार सिंह ने बताया कि शासनादेश के मुताबिक आठ हेक्टेयर भूमि सहारनपुर मंडल के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर जिलों में तलाश की जाएगी। भूमि मिलने के बाद वन विभाग, लखनऊ और भारत सरकार के केंद्रीय वन मंत्रालय नई दिल्ली से पेड़ कटान की सभी औपचारिकता को पूर्ण करने के बाद पूर्वी यमुना नहर की पटरियों का निर्माण शुरू हो पाएगा।