शामली। पैर की हड्डी टूटे बिना ही चिकित्सक ने ऑपरेशन कर दिया। जिससे मरीज के पैर में सेप्टिक हो गया। बाद में कहीं और इलाज कराया, तो पता लगा कि उसके पैर की हड्डी नहीं टूटी थी। पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम में मामला डाल दिया। जिस पर उपभोक्ता फोरम ने आरोपी चिकित्सक पर 90 हजार रुपये का जुुर्माना लगाया है।
दो जून 2012 में खेड़ीकरमू निवासी साबिर पुत्र सीटू को सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लग गई थी। जिस पर परिजनों ने उसे बुढ़ाना रोड स्थित डॉ. देवेंद्र सिंघल के यहां भर्ती कराया। देवेंद्र सिंघल ने साबिर के पैर का एक्सरे कराया और पैर की हड्डी टूटी होने के बारे में कहा।
देवेंद्र ने साबिर के पैर पर कच्चा प्लास्टर कर दिया। जिसके चिकित्सक ने पांच हजार रुपये लिए। सात दिन बाद साबिर को पक्का प्लास्टर किया गया।
इस बीच साबिर के पैर में सेप्टिक हो गया। जिस पर साबिर ने गुरु तेगबहादुर अस्पताल में अपना इलाज शुरू कराया। वहां पर चिकित्सकों ने उसका एक्सरे किया और बताया कि पैर की हड्डी टूटी नहीं है। प्लास्टर होने के कारण सेप्टिक हुआ है। जिसके चलते साबिर के कई ऑपरेशन हुए।
जिसके बाद ही साबिर ठीक हो सका। उसने आरोपी चिकित्सक देवेंद्र सिंघल को शिकायत की, लेकिन उसने उन्हें भगा दिया। जिस पर साबिर ने आरोपी चिकित्सक के खिलाफ मामला उपभोक्ता फोरम में डाल दिया और पांच लाख का हर्जाना देने की मांग की। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष एसकेएस यादव व सदस्य श्रवण कुमार की पीठ ने सुनवाई की।
पत्रावलियों का अवलोकन किया और चिकित्सक डॉ. देवेन्द्र सिंघल को दोषी माना। अपने फैसले में पीठ ने साबिर के इलाज में हुए खर्च करीब 55 हजार और खाने व वाद व्यय आदि का खर्च मिलाकर 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इस जुर्माना की राशि को पीड़ित को दिए जाने के आदेश दिए गए।