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Shamli News: एक शिक्षा मित्र के सहारे चल रहे शहर के नौ सरकारी स्कूल

Wed, 09 Apr 2025 12:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नगरीय क्षेत्र में पढ़ाई पर अधिक फोकस करने के लिए शहरी स्कूलों को नगर संवर्ग में लाने का फैसला उलटा साबित हुआ। करीब 43 वर्ष पहले 1981 में नियमावली तो बनाई गई, मगर कभी भी नगर क्षेत्र में शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा सकी। यही कारण है कि शहर के 9 स्कूल जहां एक-एक शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं वहीं 9 को बंद करना पड़ा है इसी कारण यहां छात्र संख्या कम हुई।
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बेसिक शिक्षा परिषद के जिले में 596 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। शासन ने 1981 में बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली में नगरीय व ग्रामीण संवर्ग को अलग कर दिया था। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने के लिए भर्तियां हुई, लेकिन नगरीय क्षेत्रों की ओर ध्यान नहीं दिया गया। सरकार ने शहरी क्षेत्र के स्कूलों में रिक्त पद भरने के लिए बीच का रास्ता निकाला। तय हुआ कि ग्रामीण क्षेत्र में पांच साल के बाद शिक्षकों की शहरी क्षेत्र में तैनाती की जाएगी, लेकिन ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में तैनाती पर उनकी वरिष्ठता ,वहां तैनात शिक्षकों से नीचे हो जाएगी। इस वजह से शिक्षकों ने नगर क्षेत्र में जाने में रुचि नहीं दिखाई। अब कई स्कूल शिक्षामित्रों या एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। 43 साल से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है जबकि शिक्षक हर वर्ष रिटायर होते रहते हैं।
-एक-एक शिक्षामित्र भरोसे नगर के स्कूल
नगर में नौ परिषदीय स्कूल है। इनमें छह प्राइमरी और तीन जूनियर है। कंपोजिट विद्यालय नंदू प्रसाद में लगभग 100 बच्चे है और सिर्फ एक शिक्षामित्र है। प्राथमिक विद्यालय नंबर तीन गुजरातियान में 50 बच्चे एक शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट नंबर पांच लाजपतनगर में 100 बच्चों पर दो शिक्षामित्र हैं। प्राथमिक विद्यालय नंबर 7 में 70 बच्चे और एक शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय नंबर 13 रेलपार में 80 बच्चों पर दो शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय नंबर 15 गुलशननगर में 70 बच्चों पर एक शिक्षामित्र व एक सहायक अध्यापक, कन्या जूनियर कंपोजिट गुजरातियान में 170 बच्चों पर एक अध्यापक व दो शिक्षामित्र तैनात हैं। कन्या जूनियर कंपोजिट विद्यालय माजरा रोड में 120 बच्चों पर एक शिक्षक व एक शिक्षामित्र, बालक जूनियर बनखंडी में 250 बच्चों पर एक शिक्षामित्र व तीन अनुदेशक तैनात हैं।
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-नियमावली में संसोधन हो तो बने बात
नगर के शिक्षक रविकांत और नीरज गोयल का कहना है कि नियमावली में संसोधन कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। यह काम शासन को करना है। नगर क्षेत्र का एचआरए यानी हाउस रेंट अलाउंस भी बेहतर होता है और शिक्षक भी काम करने के इच्छुक है। एक-एक शिक्षामित्र होने से बीमार होने पर दिक्कतें आती है और स्कूल बंद नहीं रख सकते, इसलिए दूसरे स्कूल से शिक्षक को अटैच कराना पड़ता है।
18 से घटकर नौ रह गई स्कूलों की संख्या
शामली नगर में पहले 18 स्कूल संचालित थे, लेकिन पिछले कई वर्षों में शिक्षकों की कमी के चलते यह घटकर केवल नौ ही रह गए है। इसमें प्राथमिक विद्यालय 3, 9 को कन्या जूनियर माजरा रोड में मर्ज कर दिया है, जबकि पांच, दो व एक को एक कर दिया गया। प्राथमिक नंबर एक व दो एक कर दिया गया है। छह व आठ को कन्या जूनियर नंबर एक में मर्ज कर दिया है।
30 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक
शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत कक्षा एक से पाचं तक की कक्षाओं में 30 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। इसी तरह कक्षा 6 से 8 के विद्यालयों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। मगर शिक्षकों की कमी के चलते अधिकतर विद्यालयों में यह मानक पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा शिक्षकों पर अध्यापन कार्य के अलावा अन्य विभागीय जिम्मेदारियों का भी बोझ है।
-इन्होंने कहा
जनपद के सभी नगर के स्कूलों में शिक्षकों की कमी चल रही है। यदि विभागीय स्तर से ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में शिक्षकों की तैनाती का नियम लागू हो जाए तो शायद समस्या को दूर किया जा सकता है। अध्यापकों की कमी को लेकर समय-समय पर अधिकारियों को पत्र भेजा जाता है।
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-लता राठौर, बीएसए।
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