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शामली: नाहिद हसन की मुश्किलें नहीं हुईं कम, गाड़ी और कागजात के बिना लटकी केस की जांच

Tue, 17 Sep 2019 12:48 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली/कैराना
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कैराना में खुला बाजार - फोटो : SHAMLI
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विधायक नाहिद हसन से गाड़ी के कागजात दिखाने को लेकर हुए विवाद को लेकर बनी टकराव की स्थिति भाकियू सुप्रीमो की मध्यस्थता से पांच दिन तो टल गई है, लेकिन गाड़ी और कागजातों के अभाव में इस केस की विवेचना अटक गई है। लिहाजा समय अवधि बीतने के बाद पुलिस विधायक नाहिद हसन को कोई रियायत देने के मूड में नहीं है। एसपी ने कहा है कि यदि तय समय में गाड़ी और कागज नहीं आते तो पुलिस गिरफ्तारी कर सकती है।
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दरअसल इस प्रकरण में दर्ज मुकदमे में सबसे अहम कड़ी वो संदिग्ध नंबर वाली गाड़ी है, जिस पर विधायक पर केस दर्ज हुआ है। पूरी जांच और केस इसी गाड़ी पर टिका है। पुलिस के पास ना तो गाड़ी के कागज है और ना गाड़ी। कागजात ना होने की स्थिति में पुलिस गाड़ी के चेसिस नंबर आदि से भी पता कर सकती है कि ये गाड़ी किस कहां बनी है और किस शोरूम से निकली है ,लेकिन दोनों ही चीजें पुलिस के पास नहीं है।

ऐसे में इनके बिना पुलिस की जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकती । पुलिस भी जानती है जांच में जितना विलंब होना उतना फायदा आरोपी पक्ष उठा सकता है। लिहाजा अब इस केस में पांच दिन के बाद विधायक पक्ष को समय सीमा देने के मूड में नहीं है।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक पांच दिन बाद यदि गाड़ी और उसके कागजात पुलिस को उपलब्ध नहीं कराए गए तो पुलिस का अगला कदम गिरफ्तारी होगा। इसके लिए पुलिस ने दोनो ही विकल्प खुले कर लिए हैं। पहला पुलिस कोर्ट से वारंट लेकर गिरफ्तारी करे, दूसरा सीधे ही गिरफ्तारी कर ली जाए।

झिंझाना में नाहिद के खिलाफ पहले से ही दर्ज केस में धारा 333 बढ़ाकर पुलिस ने नाहिद की सीधे गिरफ्तारी का रास्ता भी तैयार कर लिया है। एसपी अजय कुमार के अनुसार आईपीसी की धारा 333 में 10 साल तक की सजा संभव है। इतनी लंबी सजा वाली धारा में पुलिस सीधे गिरफ्तारी भी कर सकती है। ऐसे यदि नाहिद पक्ष की ओर से नकारात्मक रुख मिला तो पुलिस इस कदम को भी उठा सकती है।

विधायक पक्ष पर भी होगा दबाव
रविवार को भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत से डीएम की वार्ता के दौरान नरेश टिकैत ने भी डीएम को आश्वासन दिया था कि यदि इस अवधि में नाहिद पक्ष गाड़ी ओर कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका तो वह भी इस मामले में मध्यस्थता नहीं करेंगे ऐेसे में विधायक पक्ष पर भी पूरा दबाव होगा कि वो दिए गए समय अवधि में अपना वादा पूरा करे।

यदि विधायक पक्ष द्वारा दी गई समय अवधि में गाड़ी और उसके कागजात नहीं दिखाए जाते तो पुलिस प्रशासन के पास गिरफ्तारी का विकल्प ही बचेगा। नियमानुसार तो कोर्ट से वारंट लेकर गिरफ्तारी की कोशिश होगी । सीधे भी गिरफ्तारी संभव है, क्योंकि झिंझाना में एसडीओ वाले केस में 10 साल तक की सजा वाला धारा लगी है। -अजय कुमार एसपी शामली
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