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13 माह की ट्रेनिंग था आंदोलन, भविष्य में काम आएगा: राकेश टिकैत

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कैराना किसान महापंचायत में राकेश टिकैत को गदा भेंट करते भाकियू के पदाधिकारी - फोटो : SHAMLI
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शामली। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली के 13 माह का आंदोलन देश के सभी लोगों के सहयोग से सफल रहा। यह किसानों की 13 महीने की ट्रेनिंग थी, जो भविष्य में काम आएगी। अभी आंदोलन खत्म हुआ है, लेकिन किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी। एमएसपी, गन्ना मूल्य वृद्घि, बकाया गन्ना भुगतान, बिजली के दामों को जोरशोर उठाया जाएगा। सरकार समझौते के मुताबिक कार्य करे। राकेश टिकैत रविवार को कैराना में पानीपत रोड पर किसान महापंचायत को संबोधित कर रहे थे।
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राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन में न कोई हारा और न कोई जीता। पंचों न सरकार के साथ जो समझौता किया, वह हमने मान लिया। सरकार के पास आचार संहिता लगने तक का समय है। इसमें सरकार योजनाएं बनाए। गन्ने का दाम बढ़ाए, बिजली की दाम कम करे और गन्ने का भुगतान कराए। किसान हर तरीके से दुखी है। सरकार किसान हित में काम करेगी तो वोट मिलेगी। किसी से जबरदस्ती वोट नहीं ले सकते। चुनाव से हमें कुछ लेना-देना नहीं है और न ही हमारे हाथ में है, हम तो बस लोगों के बीच जाकर सरकार के काम बताएंगे। किसान से जुड़े हर मुद्दे पर सरकार से बात की जाएगी। एमएसपी लेकर रहेंगे, कमेटी में ऐसे लोग शामिल किए जाएं जो किसान हित में सोचते हों। सरकार पूंजीपतियों के कॉलेज में पढ़ने वाले प्रोफेसर इसमें शामिल न करे।
कैराना से पलायन नहीं हुआ, ये सरकार का प्लान है
कैराना से पलायन के मुद्दे पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि यह पलायन नहीं सरकारी प्लान है। यहां का आदमी काम करने पानीपत जाता है। यहां बिजली महंगी है, हरियाणा में सस्ती है। यहां गन्ना मूल्य कम है, हरियाणा में ज्यादा है। सरकार इन समस्याओं को दूर करे, यहां इंडस्ट्री लगाए तो कोई पलायन नहीं करेगा। किसानों से कहा कि किसी के बहकावे में न आएं। अपनी खेतीबाड़ी, रोजगार और बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें। सियासी चालों में न पड़ें और एकजुट रहे।
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पंजाब के लोगों से सीखें आंदोलन रणनीति
राकेश टिकैत ने कहा कि पंजाब के लोगों से आंदोलन की रणनीति सीखने की जरूरत है, उनका सिस्टम अख्तियार कर लें तो देश में कोई आंदोलन चलाने में दिक्कत नहीं रहेगी। पंजाब के लंगर चलाने वाले मंच पर नहीं जाते थे। जबकि यहां के लोग मंच पर ज्यादा रहेंगे और काम कम करेंगे। किसान आंदोलन के दौरान हर मौसम में घर के बाहर बांस की झोपड़ियों में रहे। अब उन झोपड़ियों को हटाने पर दर्द हुआ। दुनिया का पहला इस तरह का आंदोलन है कि प्रधानमंत्री के बड़ी घोषणा के बाद भी लोग गए नहीं। नौ दिसंबर को समझौते के बाद भी भीड़ बढ़ी। आंदोलन के वह गांव याद आएंगे। 40 लाख के करीब लोग आंदोलन में पहुंचे। वैचारिक रूप से बहुत लोग जुड़े। यह वैचारिक क्रांति थी जो पूरी दुनिया में गई। आंदोलन में 24 घंटे काम करने वाले, सफाई कर्मचारियों और शहीदों का आंदोलन में योगदान रहा। सभी शहीदों के घर हम जाएंगे। शामली से बड़ी संख्या में लोग और काफी मात्रा में राशन पहुंचा। हर वर्ग ने आंदोलन में योगदान दिया।

कैराना किसान महापंचायत में राकेश टिकैत का स्वागत करती पूर्व सांसद मुनव्वर हसन की बेटी इकरा हसन- फोटो : SHAMLI

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