चौसाना क्षेत्र के गांव भढी जर्जर हालत में सरकारी अस्पताल
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जच्चा-बच्चा केंद्र के खिड़की-दरवाजे भी गायब
चौसाना। यमुना के पास स्थित भड़ी गाव में वर्षों पहले बना जच्चा-बच्चा खंडहर हो गया है। इसके खिड़की-दरवाजे भी लोग उखाड़कर ले गए लेकिन यहां पर कभी एएनएम आई और न ही कभी चिकित्सक की तैनाती हुई। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं नहीं मिल पाती। आसपास प्रसव की सुविधा नहीं होने के कारण 15 किमी ऊन या फिर सहारनपुर के गंगोह में जाना पड़ता है।
चौसाना से करीब पांच किमी की दूरी पर स्थित यमुना खादर के गांव भड़ी की आबादी करीब छह हजार है। भड़ी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊन की दूरी लगभग 15 किमी है। गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए भड़ी में सपा सरकार में जच्चा-बच्चा केंद्र का निर्माण हुआ था। तब महिलाओं को यहां पर स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन इसमें कभी डाक्टर की तैनाती नहीं हुई और न ही कभी एएनएम आई। महिलाओं को यहां सामान्य सुविधाएं भी नहीं मिल पाई, प्रसव की सुविधा मिलना तो दूर की बात है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए 15 किमी दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊन या फिर इतनी ही दूर सहारनपुर के गंगोह में निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। ग्रामीण कामिल, यूसुफ, शब्बीर अहमद, अनीस अहमद, जाहिद, इकराम, गुलफाम आदि ने बताया कि गांव में बना जच्चा-बच्चा केंद्र भवन खंडहर हो चुका है। इसके खिड़की-दरवाजे तक लोग उखाड़कर ले गए हैं। उन्होंने भवन को दुरुस्त कराकर यहां पर चिकित्सा स्टाफ की तैनाती की मांग की है। उधर, ऊन ब्लाक के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. लेखराम का कहना है कि कोरोना के कारण क्षेत्र में नहीं जा पाए। वह जल्द ही मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे। जच्चा-बच्चा केंद्र को दुरुस्त कराकर वहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जाएगा।