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फिर ओवरफ्लो होकर टूटी मामौर झील, सैकड़ों बीघा गेहूं व सब्जी की फसल जलमग्न

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कैराना में मामौर झील टूटने से जलमग्न हुई फसल। - फोटो : SHAMLI
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फिर ओवरफ्लो होकर टूटी मामौर झील, सैकड़ों बीघा गेहूं व सब्जी की फसल जलमग्न
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कैराना। मामौर झील मंगलवार सुबह एक बार फिर ओवरफ्लो होने के बाद गांव के टापू के पास से टूट गई। जिसके बाद किसानों की सैकड़ों बीघा गेहूं और सब्जी की फसल जलमग्न हो गई। बाद में राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पोर्कलेन मशीन की मदद से पानी रुकवाया।
मंगलवार सुबह करीब चार बजे गांव मामौर के टापू के पास झील के किनारे पर बनाई गई मिट्टी की आड़ टूट गई। जिसके बाद झील का पानी तेजी के साथ विनोद, सोखा, सूरता, वसी, इलियास, टीपा, पीरु, भूरा, जमील, शकीला व जितेंद्र आदि किसानों के खेतों में भर गया। जिससे सैकड़ों बीघा गेहूं व सब्जी की फसलें जलमग्न हो गईं। किसान खुद ही टूटी हुई मिट्टी की आड़ को रोकने में जुट गए। किसानों ने लकड़ियों की मदद से मिट्टी के बोरे व मिट्टी डालकर पानी को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण झील का पानी नहीं रुका। किसानों ने प्रशासन से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग की है।
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एसडीएम के आदेश पर पहुंची राजस्व टीम
झील के किनारे पर पानी रोकने के लिए लगाई गई आड़ टूटने की सूचना किसानों ने एसडीएम संदीप कुमार को दी। जिसके बाद एसडीएम के निर्देश पर कानूनगो सोहनपाल राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पोर्कलेन मशीन मंगवाकर कई घंटों की मशक्कत के बाद पानी की रोकथाम कराई गई। लेकिन तब तक सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का कराया जा रहा है कार्य
किसानों के लिए नासूर बन चुकी मामौर झील के पास नमामि गंगे योजना के तहत जल निगम की ओर से करीब 78.60 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण शुरू कराया गया है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में कैराना से जाने वाला गंदा पानी व मामौर झील का गंदा पानी बड़े पाइपों से पहुंचाया जाएगा। जहां पर प्लांट में पानी को शुद्ध करने के बाद उसे यमुना नदी में छोड़ा जाएगा। साथ ही गंदे पानी से निकलने वाले अपशिष्ट से खाद बनाई जाएगी। बताया गया है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा। जिसके बाद मामौर, पंजीठ, हैदरपुर, काकौर आदि गांवों में दूषित भूजल की समस्या से भी निजात मिल सकेगी।
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