चौसाना। कोरोना की दूसरी लहर बड़ी संख्या में जानें लील गईं। आलम यह है कि गांवों में कई-कई लोगों की मौत बुखार के कारण हो गई, लेकिन निगरानी समितियों से लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कोई गौर नहीं किया। गांव खोड़समा में बीते कुछ दिनों में ही 12 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन ग्रामीणों की न तो स्वास्थ्य जांच हुई और न ही किसी अधिकारी ने गांव में पहुंचकर सुध ली।
गांव खोड़समा में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद से बुखार, खांसी, सांस लेने में समस्या से ग्रसित मरीजों के बढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया था। गांव में 12 लोगों से अधिक की मौत हो चुुकी है। हालांकि मरने वाले किसी भी व्यक्ति ने कोरोना की जांच नहीं कराई, लेकिन उनमें लक्षण कोरोना जैसे ही थे।
ग्रामीण बताते हैं कि राजस्व व पंचायत के कर्मचारी भी गांवों में आते-जाते रहते हं। उन्हें बुखार से मरने वाले लोगों की जानकारी भी है, लेकिन उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग अथवा प्रशासन का कोई अधिकारी गांव वालों की सुध लेने नहीं आया। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में बुखार पीड़ितों की कोरोना जांच नहीं कराई। गांव में अभी भी बड़ी संख्या में लोग बुखार से पीड़ित हेँ और इधर-उधर से अपना इलाज करा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बीते कुछ दिनों में ही गांव के कवल सिंह (85), लिल्ला (55), मोमीन 30, तारो 55, शीला देवी 80, बेगराज 45, उषा 45, जरीफन 80, बिल्लू 55, नीफो 60 आदि बुखार के चलते दम तोड़ चुके हैं।
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चुनाव के बाद बढ़ी मरने वालों की संख्या : प्रधान
नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान विनोद कुमार का कहना है कि उन्होंने संक्रमण के बढ़ने के चलते गांव को सैनिटाइज कराया था। गांव में चुनाव के बाद से कई मौतें बुखार से हो चुकी हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों से इसकी कोई सुध नहीं ली। गांव में कोई कैंप नहीं लगाया गया। हम नवनिर्वाचित प्रधान हैं। अधिकारियों से संपर्क कर प्रयास कर रहे हैं कि गांव में कैंप लगा लोगों के स्वास्थ्य की जांच हो तथा उन्हें सही उपचार मिल सके। उधर, खोड़समा में लगातार हो रही मौतों से घबराए ग्रामीणों ने गांव में यज्ञ का आयोजन कराया। गांव के लोग लगातार हो रही मौतों से दहशत में हैं।
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ये बोले ग्रामीण.
- कोरोना के कारण ग्रामीणों में दहशत है। मैं लंबे समय तक बुखार से पीड़ित रहा। उस दौरान मुझे सांस लेने में दिक्कत हुई। करनाल में उपचार कराया। 25 दिन में स्वास्थ्य में सुधार हुआ। गांव में अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं जो बाहर अपना इलाज नहीं करा पा रहे। - जयवीर
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गांव में हर मोहल्ले में बुखार से मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कैंप नहीं लगाया गया। स्थानीय चिकित्सक भी इस तरह के मरीजों का उपचार करने से डर रहे हैं। शहर में जाकर इलाज कराने की सलाह देते हैं। - पाल्लेराम
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बुखार ने गांव में कहर ढहा रखा है। चुनाव के बाद से दर्जनों मौतें हो चुकी हैं, लेकिन जिला प्रशासन इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बुखार से गांव में सैकड़ों लोग बीमार पड़े हैं। गांव में दहशत का माहौल है। लोग अपने घर से भी बाहर नहीं निकल रहे। - सुखपाल सिंह
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कोट...
निगरानी समिति काम कर रही हैं। बीडीओ निगरानी समिति की देखरेख कर रहे हैं। जहां से शिकायतें मिल रही हैं वहां कैंप लगाए जा रहे हैं और सैंपलिंग भी हो रही है। खोड़समा की जानकारी नहीं है। यदि कुछ ऐसा है कि मौतें हुईं हैं और कैंप नहीं लगा तो कैंप लगाकर जांच कराई जाएगी। - डॉ. सलीम, चिकित्सा प्रभारी ऊन