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किशोरी के साथ दुष्कर्म के मुजरिम को आजीवन कठोर कारावास

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किशोरी से दुष्कर्म में आजीवन कारावास
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अपर जिला सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायालय पॉक्सो) ने लगाया 40 हजार का अर्थदंड
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। दो साल पहले झिंझाना क्षेत्र में किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोष सिद्ध पाए जाने पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायालय पॉक्सो) मुमताज अली ने मुजरिम डिंपल को आजीवन कठोर कारावास व 40 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया।
जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान व विशेष लोक अभियोजक पुष्पेंद्र मलिक ने बताया कि झिंझाना क्षेत्र के एक गांव में 5 जून 2020 की रात करीब 11 बजे डिंपल साढे़ 15 वर्षीय किशोरी को उठाकर जंगल में ले गया तथा दुष्कर्म किया। अगले दिन छह जून को किशोरी के पिता ने झिंझाना थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने किशोरी का मेडिकल कराकर कोर्ट में बयान दर्ज कराए। नौ जून को पुलिस ने मुजरिम डिंपल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह पेश किए गए।
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शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने व पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद अपर जिला सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायालय पॉक्सो) मुमताज अली ने दोष सिद्ध पाए जाने पर मुजरिम डिंपल को आजीवन कठोर कारावास व 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दुष्कर्म के झूठे मुकदमे पर अदालत ने लिया कड़ा संज्ञान
मुकदमे की वादी के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति, मुकदमे के विवेचक पर तल्ख टिप्पणी
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। कांधला थाने में एक युवती के नाबालिग बहन के साथ दर्ज कराए दुष्कर्म के झूठे मुकदमे पर अदालत ने कड़ा संज्ञान लेते हुए वादी के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया। साथ ही मुकदमे के विवेचक की कार्यप्रणाली पर भी तल्ख टिप्पणी की। वहीं, जेल में बंद आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान व विशेष लोक अभियोजक पुष्पेंद्र मलिक ने बताया कि कांधला थाने में एक युवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि तीन मई 2022 की रात करीब 11 बजे दो आरोपी उसकी 17 वर्षीय बहन का बहला-फुसलाकर और शादी का झांसा देकर एक आफिस में ले गए थे। वहां मुख्य आरोपी ने उससे दुष्कर्म किया। पुलिस ने आठ मई को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पीड़िता ने पुलिस के सामने व कोर्ट में बयान के दौरान दुष्कर्म की घटना से इनकार कर दिया। उसने कहा कि उसकी बहन ने लोगों के बहकावे में आकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़िता ने मेडिकल कराने से भी इनकार कर दिया। वह आरोपियों को जानती भी नहीं है।
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पुलिस 161 के तहत पीड़िता के बयान लेने के बाद भी आरोपी के विरुद्ध कोर्ट में रिमांड याचना करती रही। शुक्रवार को मामले में अपर जिला सत्र न्यायाधीश मुमताज अली ने दुराचार का झूठा मुकदमा होने के कारण जेल में बंद आरोपी को रिहा करने के आदेश जारी कर दिया। मुकदमे के विवेचक पर तल्ख टिप्पणी की और मुकदमे की वादी के विरुद्ध उचित कार्रवाई के लिए एसएसपी को आदेश दिया।
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