शामली। जिले के प्रगतिशील किसान अब रासायनिक खादों को पीछे छोड़ वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) से अपनी खेती को नया रूप दे रहे हैं। इस जैविक खाद से न केवल फसल उत्पादन में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, बल्कि किसानों ने रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।
वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर शामली के किसान अब हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और देहरादून तक सप्लाई कर रहे हैं। इससे उन्हें हर माह अच्छी आमदनी मिल रही है और जिले की पहचान जैविक खेती के क्षेत्र में तेजी से बन रही है।
—हर साल 25 से 30 लाख की आमदनी
गांव बुच्चाखेड़ी के बीए पास दीपक सैनी ने करीब चार साल पहले हरियाणा के एक किसान से प्रेरित होकर वर्मी कंपोस्ट तैयार करना शुरू किया। उन्होंने गांव में 250 यूनिट और हरियाणा के गन्नौर में 300 यूनिट लगाकर उत्पादन शुरू किया। आज वे शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, करनाल, रोहतक, जींद और देहरादून तक वर्मी कंपोस्ट बेच रहे हैं। दीपक अब 25 से 30 लाख रुपये सालाना की आमदनी के साथ 15 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। वह बताते हैं कि वर्मी कंपोस्ट से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल की उपज में दोगुनी बढ़ोतरी होती है।
-इस्सोपुर टील के सुभाष चंद, जैविक खेती के प्रेरणा स्रोत
इस्सोपुर टील गांव के किसान सुभाष चंद ने कृषि अधिकारी प्रदीप यादव की प्रेरणा से एक वर्ष पूर्व वर्मी कंपोस्ट तैयार करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि खेतों में इस खाद के प्रयोग से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी हुई है। सुभाष चंद वर्तमान में 30 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं, जिसे वे शामली के विभिन्न गांवों में सप्लाई कर रहे हैं। उन्होंने पांच लोगों को रोजगार भी दिया है और आगे यूनिट का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
-राजबीर सिंह, नुकसान से सफलता तक की मिसाल
पठानपुरा गांव के किसान राजबीर सिंह पहले रासायनिक खादों पर निर्भर थे, जिससे गन्ने और गेहूं की फसल बार-बार खराब हो रही थी। फिर उन्होंने 15 बीघा जमीन पर वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग किया, जिससे दोगुनी उपज मिली। अब वह 175 बीघा भूमि में खुद की तैयार की वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करते हैं और आसपास के किसानों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं। राजबीर वर्मी कंपोस्ट से तैयार बीजों की बिक्री कर अतिरिक्त आमदनी भी कमा रहे हैं।
-वर्मी कंपोस्ट के लाभ, उपज बढ़े, मिट्टी संवरी
-जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव के अनुसार मिट्टी की उर्वरता और जैविक संरचना में सुधार।
-फसल उत्पादन में दोगुनी वृद्धि।
-रासायनिक खादों की तुलना में अधिक सुरक्षित और पौष्टिक उपज।
-गोबर या जैविक अपशिष्ट से 60-90 दिनों में तैयार।
-पर्यावरण के अनुकूल, बदबू रहित और मक्खी-मच्छर रहित खाद।
सरकार भी दे रही प्रोत्साहन
कृषि विभाग वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने वाले किसानों को प्रति यूनिट 5,000 रुपये की सब्सिडी दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार, रासायनिक खादों का अत्यधिक प्रयोग जमीन की उर्वरा शक्ति को नुकसान पहुंचाता है, जबकि वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की गुणवत्ता को बरकरार रखता है। कृषि उपनिदेशक प्रमोद कुमार का कहना है कि शामली जिले में वर्मी कंपोस्ट के बढ़ते प्रयोग से जैविक खेती को नई दिशा मिल रही है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।