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लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई

Sun, 18 Sep 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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कैराना में शायरी करते स्वर्गीय मुजफ्फर रजमी का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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शामली। ये जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने, लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई। यह शायर कैराना के शायर मुजफ्फर इस्लाम रजमी का है। जिनकी चौथी पुण्य तिथि 19 सितंबर को है। 
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कैराना के प्रसिद्ध शायर मुजफ्फर इस्लाम रजमी पांच जून 1935 में जन्मे थे। कैराना और शामली में पढ़कर  वीवीपीजी कालेज से स्नातक की डिग्री लेकर पालिका रुड़की से कार्यालय अधीक्षक पद से 1992 से सेवानिवृत्त हुए। बचपन से शायरी के शौकीन रहे रजमी साउदी अरब- दुबई, पाकिस्तान में  आयोजित कई मुशायरों में अपनी शायरी का लोहा मनवाना चुके हैं।

दिल्ली के श्रीराम लीला मैदान में इंडो पाक मुशायरा में हिस्सा लेकर कैराना का नाम रोशन कर चुुके हैं। उनकी शायरी से बड़े से बड़े शायर तारीफ किए बिना नहीं रह पाते थे। भी 19 सितंबर 2012 में 74 वर्ष की आयु में इंतकाल हो गया। जीवन भर अपना आशियाना तैयार न करके किराए के मकान में अपनी पूरी जिंदगी गुजार दी। 
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अपने किराए के मकान में रहने पर यू शायर पढ़ दिया कि परिंदे भी रहते पराये आशियानों में हमने उम्र गुजार दी किराए के मकानों में। मौहम्मद रजमी के तीन बेटे जिनमें जावेद इकबाल, परवेज जमाल, नवेद कमल व  परवेज एक बेटी हनी खातून है।
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