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किसान महापंचायत में खाप दिखाएंगी अपनी ताकत

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किसान महापंचायत में खाप दिखाएंगी अपनी ताकत
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शामली। मुजफ्फरनगर में पांच सितंबर को होने वाली किसान महापंचायत पर देशभर की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह महापंचायत वेस्ट यूपी की राजनीति को नई दिशा देगी। महापंचायत को सफल बनाने के लिए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत दूसरे प्रदेशों में किसान और अन्य संगठनों से संपर्क साधकर उन्हें आमंत्रित किया है। वहीं, भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत आसपास की तमाम खापों को साधा है। सभी खापों ने भी महापंचायत के लिए पूरी ताकत झोंकने का एलान किया है। महापंचायत में सभी खाप अपनी ताकत दिखाएंगी।
बत्तीसा खाप के चौधरी बाबा सूरजमल का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से महापंचायत बुलाई गई है। यह महापंचायत किसानों का भविष्य तय करेगी। सरकार को तीनों कृषि कानून हर हाल में वापस करने होंगे। बत्तीसा खाप से ट्रैक्टर-ट्रॉली और बसों में करीब 12-13 हजार लोग शामिल होंगे। बाहर से आने वाले किसानों के लिए भंडारों की व्यवस्था रहेगी। एक ट्रॉली में चने की सब्जी और पूरी लेकर लोग पहुंचेंगे। मुजफ्फरनगर में भी भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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गठवाला खाप के थांबेदार श्याम सिंह बहावड़ी का कहना है कि मुजफ्फरनगर की महापंचायत ऐतिहासिक होगी। गठवाला खाप की महापंचायत में सर्वाधिक उपस्थिति रहेगी। दूसरे राज्यों से आने वाले किसानों के लिए भी खाने-पीने के इंतजाम किए गए हैं। यह पंचायत भाजपा सरकार के पैर उखाड़ने वाली साबित होगी। किसानों की जायज मांगें सरकार को माननी पड़ेंगी।
कुंडू खाप के उपेेंद्र का कहना है कि यह लड़ाई किसानों के वजूद की लड़ाई है। किसान इस सरकार से त्रस्त है और उसका रवैया औरगंजेब की तरह का है। किसानों को महापंचायत के जरिए दिखाना है कि वह किस स्थिति में हैं। कृषि कानून को खिलाफ पूरे देश में जनआंदोलन खड़ा हो गया है।
निर्वाल खाप के धर्मवीर सिंह का कहना है कि ऐसी ऐतिहासिक महापंचायत इतिहास में कभी नहीं हुई होगी। महापंचायत आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी। अभी भी वक्त है सरकार को हठधर्मिता छोड़कर किसानों के हित में निर्णय लेना चाहिए। निर्वाल खाप की ओर से शामली के अलावा बिजनौर और हरियाणा से भी किसान पहुंचेंगे। मुजफ्फरनगर के सर छोटूराम इंटर कॉलेज में करीब 10 हजार लोगों के खाने की व्यवस्था की जाएगी।
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कालखंडे खाप के चौधरी संजय कालखंडे का कहना है कि सरकार को इस महापंचायत के बाद अपने कदम पीछे खींचने पड़ेंगे। सरकार हठधर्मिता दिखा रही है। किसान भी पीछे हटने वाले नहीं हैं। हम भी 2024 तक सरकार को नाकों चने चबवाने को तैयार बैठे हैं।
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