खाद के गड्ढों को लेकर विवाद बढ़ा
विवाद की शुरुआत खाद के गड्ढों पर कूड़ा डालने को लेकर हुई। कर्मचारियों ने बताया कि वाल्मीकि बस्ती के पास बने गड्ढों में कूड़ा डालने पर उन्होंने पहले ही आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उनके साथ अभद्रता की गई और तीन सफाईकर्मी अरुणा, सन्नी और धीरज को हटा दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि इसी के बाद हालात इतने बिगड़े कि हड़ताल अनिवार्य हो गई।
कार्रवाई तक जारी रहेगी हड़ताल
कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और हटाए गए तीनों कर्मचारियों को वापस काम पर नहीं रखा जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि वे अब पीछे नहीं हटेंगे।
कस्बे में बढ़ती गंदगी से जनता त्रस्त
हड़ताल के पहले ही दिन कस्बे की गलियों और मोहल्लों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। दुर्गंध फैलने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चेयरमैन और कर्मचारियों की इस लड़ाई की कीमत आम जनता चुका रही है। उन्होंने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है।
कर्मचारी और समाज के लोग रहे मौजूद
हड़ताल स्थल पर सफाई नायक अमित कुमार, आनंद चंचल, विनोद कुमार, चमनलाल, पदम, किशनलाल, गौतम, दीपक, राजेश, प्रदीप, ललित, आकाश, भानू, रवि गहलोत, सोनू, विश्वास, अमित वाल्मीकि, बीनू, मनीष, लक्ष्मी, रेशमा, मोनिका, रेखा, सुमन सहित समाज के कई लोग मौजूद रहे।