कैराना। 1947 के बंटवारे के समय कैराना से काफी परिवार पाकिस्तान चले गए थे। ऐसे में कैराना के लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। यहां के लोग अपनी रिश्तेदारी में पाकिस्तान आते-जाते थे। भारत में उस समय पान-सुपारी सस्ती थी, जबकि पाकिस्तान में बनी मिर्जा चप्पल वजन में हल्की, मजबूत व सस्ती होने के कारण यहां पसंद की जाती थी।
इसके अलावा पाकिस्तान में बना डिस्को कपड़ा पर काफी पसंद किया जाता था। यहां से पाकिस्तान रिश्तेदारी में जाते समय यहां के लोग पान व सुपारी ले जाते थे और वहां से वापसी में मिर्जा चप्पल व डिस्को कपड़ा लेकर आते थे। इससे उनको अच्छा मुनाफा होता था। 1990 के दशक में पाकिस्तान में सोने के भाव कम होने के कारण कुछ लोग सोने की तस्करी में जुड़ गए थे। बाद में सोने का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में बराबर होने से सोने की तस्करी का धंधा बंद हो गया था। इसके बाद पाकिस्तान से पिस्टलों की तस्करी शुरू हुई थी। अब पाकिस्तान के लिए जासूसी करने में युवाओं को लालच देकर जोड़ा जा रहा है।
आतंकी घटनाओं में भी चर्चाओं में रहा कैराना का नाम
कैराना। 17 जून 2021 को बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर सिकंदराबाद से आने वाली ट्रेन में कपड़ों के पार्सल में ब्लास्ट हुआ था, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई थी। इस मामले की जांच एनआईए व एटीएस को सौपी गई थी। एनआईए ने ब्लास्ट के मामले में हैदराबाद में कपड़ों का काम करने वाले कैराना निवासी दो सगे भाइयों इमरान व नासिर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। बाद में एनआईए ने कैराना से कफिल व सलीम टूईया को भी गिरफ्तार किया था।
वहीं आपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के मामले में मई 2025 में पानीपत सीआईए ने कैराना के मोहल्ला बेगमपुरा निवासी नोमान इलाही को गिरफ्तार किया था। सीआईए ने तीन बार नोमान इलाही को कैराना लाकर उसके मकान को खंगाला था, जिसमें पाकिस्तान के वीजा व नकली पासपोर्ट मिले थे।