कैराना। पाकिस्तान से आईएसआई से संपर्क हो या नकली करेंसी को मामला सभी में देश की सुरक्षा एजेंसियां की कैराना समेत पूरे जिले में नजर रहती है। कस्बा कैराना पहले से ही आईएसआई गतिविधियों के लिए चर्चाओं में रहा है।
1990 से 1995 के बीच पाकिस्तान से सोने के बिस्कुट के साथ ही हथियारों की तस्करी चरम पर थी। बताया जाता है कि पाकिस्तान के बलुचिस्तान में हथियारों की खुली मंडिया लगती है। कैराना निवासी इकबाल काना व दिलशाद मिर्जा सोने की तस्करी छोड़ पिस्टलों की तस्करी में लग गये थे। 1995 में पाकिस्तान से पिस्टलों की खेप दिल्ली आई थी। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पिस्टलों के साथ ही 6 तस्करों का गिरफ्तार किया था, जिनसे जानकारी मिली थी कि ये पिस्टल इकबाल काना ने पाकिस्तान से मंगाई थी, जिन्हें भारत में सप्लाई करना था। सुरक्षा एजेंसियों ने इकबाल काना व दिलशाद मिर्जा को पकड़ने के लिए जाल बिछाया तो दोनों ही पाकिस्तान भाग गए थे। इकबाल काना के परिवार के लोगों के अलावा रिश्तेदार भी कैराना व आसपास के क्षेत्रों मे रहते है। ऐसे में इकबाल काना अपनी रिश्तेदारी व अन्य परिचितों के संपर्कों का फायदा उठाकर यहां के युवाओं को आईएसआई के लिए काम करने के लिए तैयार कर रहा है। युवाओं को जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर उन्हें अपने साथ जोड़ा जाता है। कैराना निवासी हमीदा भी पहले ही पाकिस्तान चली गई थी। सुरक्षा एजेंसियों के अलावा पुलिस इकबाल काना व दिलशाद मिर्जा के संपर्क में आने वालों की कुंडलियां खंगाल रही है।
एक महीने से जिले पर एटीएस की बनी थी नजर
कैराना। मंगलवार सुबह एटीएस सहारनपुर ने कैराना से चार युवकों व शामली से एक महिला को उठाया। बताया गया है कि पिछले करीब एक माह से एसटीएस कैराना क्षेत्र पर नजर रख रही थी। एटीएस बार-बार पाकिस्तान में रिश्तेदारी के बहाने जाने वालों व कम समय में अमीर बनने वालों पर नजर रख रही है। एटीएस ने अपने स्तर पर जांच में लगी रही और पूर्व में पुलिस को इसकी कोई जानकारी नहीं दी थी।