मानवाधिकार संरक्षण का दावा, फिर भी पुलिस पर लगते हैं आरोप
शामली। जिले के सभी थानों में मानवाधिकार संरक्षण के बोर्ड लगे हैं। पुलिस द्वारा मानवाधिकार संरक्षण के दावा किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस पर अक्सर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के आरोप लगते रहते हैं। जिले में पूर्व के सालों में मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामले सामने आ चुके हैं।
हर साल 10 दिसंबर का दिन राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को मानवाधिकार के प्रति जागरूक करना है। मानवाधिकार उल्लंघन करने के ज्यादा मामले पुलिस थानों में सामने आते रहे हैं। पुलिस पर अक्सर अवैध रूप से हिरासत में रखने, पीड़ितों की तत्काल प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज न करने, नियम विरुद्ध आरोपी को हथकड़ी लगाना आदि मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। पूर्व में पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामले सामने आ चुके हैं।
मानवाधिकार संबंधी आयोग के निर्देश:
थाने पर आने वाले हर व्यक्ति की प्राथमिकी रिपोर्ट अवश्य लिखी जाएगी।
थाने पर लाए गए व्यक्ति के साथ मारपीट या असहनीय व्यहार नहीं किया जाएगा।
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर सक्षम न्यायालय में पेश किया जाए।
गिरफ्तार किए व्यक्ति का गिरफ्तारी का कारण बताया जाएगा।
रिमांड पर लाए व्यक्ति का प्रत्येक 48 घंटे बाद चिकित्सा परीक्षण अवश्य कराया जाएगा।
पुलिस कर्मचारी द्वारा किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करते समय अपनी वर्दी पर नेम प्लेट धारण करना आवश्यक होगा।
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पूर्व में आए मानवाधिकार उल्लंघन के मामले
केस एक: वर्ष 2019 में थाना जीआरपी पुलिस ने युवक के साथ मारपीट व अमानवीय व्यवहार किए जाने का प्रकरण भी चर्चाओं में रहा है। इस प्रकरण में तत्कालीन थाना प्रभारी निलंबित हुए थे। पीड़ित की तरफ से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी गई थी। आयोग ने इस प्रकरण पर संज्ञान लिया था।
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केस दो: वर्ष 2015 में शामली के कमला कालोनी निवासी व्यापारी राकेश गोयल के भाई अजय उर्फ बबलूू को शहर कोतवाली पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लेकर गंभीर यातनाएं देने का मामला उस समय काफी चर्चाओं में रहा था। इस प्रकरण में कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन कोतवाल समेत पांच पुलिसकर्मियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पीड़ित पक्ष ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी। आयोग ने इस पर संज्ञान लिया था और इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन माना था। यह मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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कोट
मानवाधिकारों का अनुपालन कराने के लिए समय-समय पर कार्यशाला आयोजित की जाती है। मानवाधिकार आयोग, शासन, माननीय न्यायालयों से जो भी दिशा निर्देश प्राप्त होते हैं, उनका थानों में पूरी तरह पालन कराया जाता है। इससे संबंधित जो भी शिकायत मिलती है, उसे गंभीरता से लेकर कार्रवाई की जाती है।
- सुकीर्ति माधव, एसपी।