शामली में आग से घिरे मकान के अंदर मासूम मुबारिक मौत और जिंदगी से लड़ रहा था तो दूसरी ओर इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल विभाग की गाड़ी खराब खड़ी रही। बाद में मजबूरन शामली से दूसरी गाड़ी बुलवाई गई।
बताया जाता है कि कैराना कोतवाली में दमकल विभाग की जो गाड़ी खड़ी हुई है। वह 1991 माडल की है। दमकल विभाग की गाड़ी को मिस्त्री ठीक करने में लगा था। जिस कारण शामली से दमकल विभाग की गाड़ी को बुलाना पड़ा जो घटना के दो घंटे बाद ही मौके पर पहुंच पायी, लेकिन तब तक मुबारिक जिंदगी की जंग हार चुका था।
जाहिदा के सिर से उसके पति का साया 11 माह पहले उठ चुका था। दो माह पूर्व उसका पुत्र फरमान भी बीमारी के चलते मर गया था। जाहिदा के पति के पास केवल 5 बीघा जमीन है। घर की रोटी के लिए जाहिदा ने ग्राम बधुपुरा से अपनी ननद के पुत्र मुबारिक को अपने पास लाकर रखा था ताकि मुबारिक और उसका दूसरा पुत्र परचून की दुकान चला कर घर का पेट पाल सके, लेकिन ऊपर वाले को शायद यह भी मंजूर नहीं था।
आग से घिरे मकान के अंदर मासूम मुबारिक मौत और जिंदगी से लड़ रहा था तो दूसरी ओर इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल विभाग की गाड़ी खराब खड़ी रही। बाद में मजबूरन शामली से दूसरी गाड़ी बुलवाई गई। बताया जाता है कि कैराना कोतवाली में दमकल विभाग की जो गाड़ी खड़ी हुई है। वह 1991 माडल की है।
दमकल विभाग की गाड़ी को मिस्त्री ठीक करने में लगा था। जिस कारण शामली से दमकल विभाग की गाड़ी को बुलाना पड़ा जो घटना के दो घंटे बाद ही मौके पर पहुंच पायी, लेकिन तब तक मुबारिक जिंदगी की जंग हार चुका था। जाहिदा के सिर से उसके पति का साया 11 माह पहले उठ चुका था। दो माह पूर्व उसका पुत्र फरमान भी बीमारी के चलते मर गया था।
जाहिदा के पति के पास केवल 5 बीघा जमीन है। घर की रोटी के लिए जाहिदा ने ग्राम बधुपुरा से अपनी ननद के पुत्र मुबारिक को अपने पास लाकर रखा था ताकि मुबारिक और उसका दूसरा पुत्र परचून की दुकान चला कर घर का पेट पाल सके, लेकिन ऊपर वाले को शायद यह भी मंजूर नहीं था।